हवाई किराया घटाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, अगले तीन महीने के लिए एयरपोर्ट फीस में 25% की कटौती
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल लेवल पर विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में आए उछाल ने एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़ दी है। इस संकट से राहत ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 09 Apr 2026 12:28:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Apr 2026 12:29:40 PM (IST)
लगातार बढ़ रहे हवाई सफर के बीच जनता को राहत (सांकेतिक तस्वीर)HighLights
- बढ़ते हवाई सफर पर सरकार ने लगाया मरहम
- लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% की कटौती
- अगले तीन महीने तक जनता को मिलेगी राहत
डिजिटल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल लेवल पर विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में आए उछाल ने एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़ दी है। इस संकट से राहत देने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने देश के सभी 34 प्रमुख एयरपोर्ट को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीनों के लिए घरेलू उड़ानों पर लगने वाले लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% की कटौती करें।
एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित एयरपोर्ट्स को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करना होगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एयरपोर्ट को होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई अगली टैरिफ निर्धारण अवधि के दौरान एडजस्ट की जाएगी। यह मंत्रालय का एक दुर्लभ हस्तक्षेप है, क्योंकि आमतौर पर निजी एयरपोर्ट के शुल्कों में सरकार सीधे दखल नहीं देती।
हवाई किरायों पर नियंत्रण की कोशिश
केरल और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार हवाई किरायों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी को रोकने के लिए सतर्क है। ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, मंत्रालय ने घरेलू एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा 25% पर स्थिर रखने की कोशिश की है।
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आसमान छू रही ईंधन की कीमतें
हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की बेस कीमत में 100% और घरेलू उड़ानों के लिए 25% से अधिक की वृद्धि की है। इसके जवाब में एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस ने अपना 'फ्यूल सरचार्ज' बढ़ा दिया था।
सरकार की इस नई पहल का उद्देश्य एयरलाइंस के परिचालन खर्च को कम करना है, ताकि अंतिम बोझ यात्रियों की जेब पर न पड़े। तीन महीने बाद इस फैसले की दोबारा समीक्षा की जाएगी।