
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा के पारादीप पोर्ट से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जा रहा 308 पहियों वाला 100 फीट लंबा ट्रक इन दिनों चर्चा की वजह बन गया है। बेल्जियम से आई 200 टन की चीनी मिल मशीन ले जा रहा यह ट्रक दिन में सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर ही चल पाता है।

यह मल्टी-एक्सल ट्रेलर करीब 100 फीट लंबा है और बेल्जियम से मंगाई गई करीब 200 टन वजन की मशीनरी ले जा रहा है। बहुत ज्यादा वजन होने की वजह से ट्रेलर बहुत धीमी स्पीड से चलता है और एक दिन में सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाता है। इसके रास्ते में आसानी से चलने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई जगहों पर ट्रेलर को गुजारने के लिए बिजली की लाइनों को कुछ वक्त के लिए हटाना पड़ा है। रास्ते में पड़ने वाले कुछ फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को भी काटा या उनमें बदलाव किया गया है।
अभी तक दो करोड़ रुपये का डीजल खर्च किया जा चुका है। साथ में दो अलग-अलग क्रेन भी चल रहे हैं। दो ट्रेलर भी हैं, जो मल्टी एक्सल ट्रेलर को अलग-अलग वक्त पर खींचने के काम करते हैं। इसके साथ में 64 से ज्यादा कर्मचारी भी चल रहे हैं। 100 फीट लंबे इस भारी-भरकम वाहन को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जमा हो रही है और इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर किए जा रहे हैं।
बलरामपुर शुगर मिल और इथेनॉल प्लांट में इस्तेमाल होने वाली इस मशीन को सड़क के जरिए यात्रा शुरू करने से पहले बेल्जियम से ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक समुद्री रास्ते से लाया गया था। पारादीप पोर्ट पहुंचने के बाद, मशीनरी झारखंड और बिहार से गुजरी और रोहतास, गया, औरंगाबाद और कैमूर से होकर आगे बढ़ी। अब यह वाराणसी होते हुए बलरामपुर की ओर जाएगी।
भारी सामान ले जा रहे ट्रक के आगे दो पायलट गाड़ियां चल रही हैं और विशेषज्ञों की एक टीम भी इस खेप के साथ है। अधिकारी लगातार रास्ते पर नजर रख रहे हैं और जहां भी व्हीकल को बहुत संकरा रास्ता मिलता है, वहां सड़क चौड़ी करने का काम किया जा रहा है। अधिकारी टोल प्लाजा के पास भी ऐसी व्यवस्था करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह बहुत बड़ी गाड़ी बिना किसी रुकावट के गुजर सके।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की हाईवे पेट्रोल टीम इस भारी-भरकम सामान को सुरक्षित रूप से ले जाने के काम में शामिल है। पुलिस, NHAI और दूसरे विभागों की टीमों ने मिलकर तय किए गए रास्ते का निरीक्षण किया। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाली सड़कों, पुलों और ओवरब्रिज की हालत और साइज का ध्यान रखा। इस ट्रांसपोर्टेशन की योजना मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिससे भारी मशीनरी सुरक्षित रूप से बलरामपुर शुगर मिल तक पहुंच सके।