
डिजिटल डेस्क। भारत की पहली पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक पर आधारित बुलेट ट्रेन का परीक्षण अगले वर्ष मई-जून के दौरान शुरू होने की पूरी संभावना है। वडोदरा में आयोजित 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पटरियों पर सफल ट्रायल पूरा होने के 2 से 4 महीनों के भीतर इसे सामान्य रेल यात्रियों की सेवा के लिए चालू कर दिया जाएगा। रेल मंत्री के अनुसार, इस हाई-स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी शेल निर्मित किया जा चुका है और वर्तमान में इसे 'स्क्वीज टेस्टिंग' प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है।
'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत विकसित किए जा रहे इस ड्रीम प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अगले साल मध्य तक ट्रेन पटरियों पर टेस्टिंग के लिए उतर जाएगी। इसके 2-4 महीने के गहन परीक्षण के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के चालू होने से पश्चिमी भारत के प्रमुख व्यावसायिक शहरों के बीच आवागमन का समय काफी घट जाएगा और यात्री वडोदरा से केवल डेढ़ घंटे (90 मिनट) में मुंबई पहुंच सकेंगे।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। रेल मंत्री के अनुसार, परियोजना के सूरत-वापी सेक्शन का निर्माण इसी वर्ष दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय रेलवे अपने पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम, पैसेंजर रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े पारंपरिक प्रोटोकॉल को आधुनिक बना रही है ताकि यात्रियों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं दी जा सकें।
विगत वर्षों में रेलवे की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चेनाब ब्रिज और मिजोरम कनेक्टिविटी जैसी कई वर्षों से लंबित परियोजनाओं को मुकाम तक पहुंचाया गया है। इस दौरान 36,000 किलोमीटर से अधिक नए रेल ट्रैक बिछाए गए हैं तथा 280 स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया है।
महामारी की चुनौतियों के बावजूद 2020 के बाद से रेलवे के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति आई है। इसके अलावा, माल ढुलाई को गति देने के लिए 'वंदे भारत' तकनीक पर आधारित कार्गो ट्रेनें भी तैयार की जा रही हैं।
आईएएनएस एजेंसी के आधार पर खबर प्रकाशित