ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस लाई अविश्वास प्रस्ताव, इतिहास में अब तक इन लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया जा चुका है यह प्रस्ताव
no confidence motion against Om Birla: कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव को 118 सांसदों का स ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 10 Feb 2026 03:14:33 PM (IST)Updated Date: Tue, 10 Feb 2026 03:17:10 PM (IST)
ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस लाई अविश्वास प्रस्तावHighLights
- कांग्रेस बोली, स्पीकर द्वारा सफाई देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ
- स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने व विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
- कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर बिरला पर किए कटाक्ष
डिडिटल डेस्क। कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव को 118 सांसदों का समर्थन हासिल है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्ष की आवाज को दबाया गया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर कहा,स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। उन पर दबाव डाला गया है, इसलिए उन्हें स्वयं सफाई देनी पड़ रही है, जो बिल्कुल उचित नहीं है।
स्पीकर द्वारा सफाई देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री पर हमले का सवाल ही नहीं उठता। उनका आरोप है कि सरकार के दबाव में आकर स्पीकर ने बयान दिया, क्योंकि उस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में उपस्थित नहीं हुए। स्पीकर द्वारा सफाई देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
इस अविश्वास प्रस्ताव के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ओम बिरला के खिलाफ यह प्रस्ताव लोकसभा में पारित हो पाएगा। साथ ही, लोकसभा स्पीकर को हटाने के नियम क्या हैं और भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक कितनी बार ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।
लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
- लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा की कार्यप्रणाली एवं संचालन नियमों के नियम 200 के तहत तय है।
- स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए किसी भी सांसद को लोकसभा महासचिव को लिखित नोटिस देना होता है।
- प्रस्ताव में लगाए गए आरोप स्पष्ट, सटीक और मर्यादित भाषा में होने चाहिए। इसमें तर्क, अनुमान, व्यंग्य या अपमानजनक शब्द शामिल नहीं हो सकते।
- नोटिस मिलने के बाद संबंधित सदस्य के नाम पर प्रस्ताव को कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
- प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख नोटिस दिए जाने के कम से कम 14 दिन बाद तय की जाती है।
- प्रस्ताव को वैध माने जाने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतः निरस्त हो जाता है।
- प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद आमतौर पर 10 दिनों के भीतर इस पर बहस और मतदान कराया जाता है।
- जब प्रस्ताव पर विचार हो रहा होता है, उस समय स्पीकर या उप-स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
- अंततः, प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत का समर्थन जरूरी होता है।
इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
- लोकसभा के इतिहास में अब तक स्पीकर के खिलाफ तीन प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका।
- 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया।
- 24 नवंबर 1966 को स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव आया, लेकिन आवश्यक 50 सांसदों के समर्थन के अभाव में यह गिर गया।
- 15 अप्रैल 1987 को स्पीकर बलराम जाखड़ के विरुद्ध प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे सदन ने अस्वीकार कर दिया।
- इसके अलावा, 1967 में डॉ. नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में जी.एम.सी. बालयोगी, 2011 में मीरा कुमार और 2020 में ओम बिरला के खिलाफ भी नोटिस देने की चर्चाएं हुईं, लेकिन ये प्रस्ताव औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ सके।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया?
यह विवाद संसद में राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद हंगामा हुआ और कांग्रेस सहित विपक्ष के कुल 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई एकतरफा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ थी, जिसके विरोध में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।