'60 पुलिसवाले ऐसे पहुंचे मानो कोई आतंकी हों', कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर SC में हुई जोरदार बहस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। गुरुवार को इस मुद्दे पर क ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 30 Apr 2026 02:32:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Apr 2026 02:32:18 PM (IST)
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर SC में हुई जोरदार बहसHighLights
- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर SC में हुई जोरदार बहस
- सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर सुरक्षित रखा फैसला
- 60 पुलिसवाले ऐसे पहुंचे मानो कोई आतंकी हो- मनु सिंघवी
डिजिटल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई उस एफआईआर से संबंधित है, जिसमें खेड़ा पर उनके पास कई विदेशी पासपोर्ट होने का झूठा दावा करने का आरोप है।
खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के जमानत खारिज करने के फैसले को चुनौती दी। सिंघवी ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' का मामला बताया। उन्होंने तर्क दिया कि असम के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से धमकी दी है कि खेड़ा अपनी बाकी जिंदगी असम की जेल में बिताएंगे। सिंघवी ने कहा, 'अगर डॉ. अंबेडकर को पता होता कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी भाषा बोलेगा, तो वह अपनी कब्र में करवटें बदल लेते'
सिंघवी ने गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि FIR में दर्ज अधिकांश अपराध जमानती हैं। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए कि एक राजनेता को गिरफ्तार करने के लिए 50-60 पुलिसवाले ऐसे पहुंचे जैसे वह कोई आतंकवादी हों। उन्होंने व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) की रक्षा की अपील की।
असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो पासपोर्ट और अमेरिका की कंपनी से जुड़े दस्तावेज दिखाए थे, वे पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।
SG ने दलील दी कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि देश के चुनावों में 'विदेशी ताकतों' के दखल की गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है ताकि यह पता चल सके कि ये नकली दस्तावेज किसने बनाए और इसके पीछे कौन से विदेशी तत्व शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज होने के बाद से खेड़ा फरार चल रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत मिलेगी या उन्हें असम पुलिस की जांच का सामना करना होगा।