EPFO New Rules: 1 लाख सैलरी पर भी 1,800 रुपये PF, कर्मचारियों की इच्छा से होगा अतिरिक्त योगदान
ईपीएफओ ने पीएफ नियमों में बदलाव करते हुए स्वैच्छिक योगदान, आसान निकासी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं। कर्मचारियों को रिटा...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 11:21:40 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 11:21:40 AM (IST)
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े नियमों को लचीला किया। (फाइल फोटो)HighLights
- 15 हजार तक पीएफ योगदान अनिवार्य रहेगा।
- अतिरिक्त योगदान अब पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
- निकासी की श्रेणियां 13 से घटकर तीन।
बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कर्मचारियों को अधिक लचीलापन देने का फैसला किया है। नए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम-2026 के तहत अब कानूनी 15,000 रुपये प्रतिमाह के वेतन सीमा तक 12 प्रतिशत पीएफ योगदान अनिवार्य रहेगा। इससे अधिक वेतन पर अतिरिक्त योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
यानी कर्मचारी अपनी इच्छा से अधिक राशि पीएफ में जमा कर सकेंगे। नियोक्ता भी चाहे तो इस अतिरिक्त योगदान के बराबर राशि जमा कर सकता है, लेकिन यह उसकी बाध्यता नहीं होगी। ईपीएफओ का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट बचत में अधिक स्वतंत्रता देना और निकासी प्रक्रिया को सरल बनाना है।
15 हजार तक अनिवार्य, उससे अधिक योगदान स्वैच्छिक
नई व्यवस्था के अनुसार अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन एक लाख रुपये प्रतिमाह भी है, तब भी अनिवार्य पीएफ योगदान 15 हजार रुपये की वैधानिक सीमा के आधार पर ही होगा। यानी कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से न्यूनतम 1,800-1,800 रुपये का योगदान किया जाएगा। इसके अलावा कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त राशि भी पीएफ खाते में जमा कर सकेगा।
निकासी के नियम हुए आसान
- ईपीएफओ ने पीएफ से एडवांस निकालने की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। पहले जहां निकासी के लिए 13 अलग-अलग श्रेणियां थीं, उन्हें घटाकर अब केवल तीन श्रेणियों में कर दिया गया है।
- इनमें आवश्यक जरूरतें (बीमारी, शिक्षा और शादी), आवास संबंधी जरूरतें तथा विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। इसके अलावा सदस्य अब अपने पात्र बैलेंस का 100 प्रतिशत तक एडवांस निकाल सकेंगे, हालांकि खाते में न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि बनाए रखना अनिवार्य होगा।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए भी नए प्रावधान
नई स्कीम में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। इसमें 'प्रिंसिपल एम्प्लॉयर' की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है। यदि कॉन्ट्रैक्टर अलग से पंजीकृत नहीं है तो कर्मचारियों के पीएफ अंशदान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी। इससे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पीएफ अधिकार अधिक सुरक्षित होंगे।
नियोक्ताओं पर बढ़ी जिम्मेदारी
- नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक नियोक्ता को स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर फॉर्म-V में संयुक्त रिटर्न दाखिल करना होगा। इसमें कर्मचारियों का आधार, पैन, यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), ग्रॉस वेतन और ईपीएफ वेतन जैसी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
- ईपीएफओ का मानना है कि नए नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुपालन आसान होगा और कर्मचारियों को अपनी सेवानिवृत्ति बचत पर अधिक नियंत्रण मिल सकेगा।
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