
डिजिटल डेस्क, मुंबई। विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने चार साल की मासूम बच्ची के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 50 वर्षीय व्यक्ति को पांच साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे दो महीने अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी। अदालत ने जुर्माने की राशि के अलावा पीड़िता को 5,000 रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की विशेष न्यायाधीश ऋचा डी. खेडेकर ने आरोपी के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि वह बच्ची के प्रति केवल स्नेह जता रहा था। जज ने स्पष्ट किया कि 12 वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ इस तरह का आचरण गंभीर यौन अपराध की श्रेणी में आता है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मासूम बच्चियों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में शुरुआत में ही सख्त सजा मिलना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे संगीन अपराधों पर रोक लग सके। यह फैसला समाज के लिए एक कड़ा संदेश है, जिससे कोई भी किसी नाबालिग के साथ ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे। कोर्ट ने सजा तय करते समय आरोपी की उम्र और उसके किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के न होने के पहलू पर भी विचार किया।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बच्ची की गवाही को पूरी तरह से विश्वसनीय माना। जिरह (Cross-Examination) के दौरान जब बच्ची से पूछा गया, तो उसने बताया कि उसके परिचित लोग उसे प्यार से गोद में उठाते हैं, हवा में उछालते हैं और चूमकर उसकी मां को सौंप देते हैं।
इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अपनों और परिचितों का यह व्यवहार सामान्य हो सकता है, लेकिन आरोपी बच्ची के लिए पूरी तरह से अजनबी था। कम उम्र होने के बावजूद बच्ची द्वारा दिए गए बयान और प्रत्यक्षदर्शियों की साक्ष्य को अदालत ने मजबूत और प्रामाणिक माना।
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घटना 3 मार्च 2025 की है, जब पीड़िता अपनी मां के साथ मंदिर जा रही थी। रास्ते में आरोपी ने बच्ची को दबोच लिया, उसकी गर्दन व हाथ जकड़ लिए और जबरन चूमते हुए उसके गाल तथा गर्दन पर काट लिया, जिससे बच्ची रोने लगी। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत आरोपी को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था।