
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष के बाद दोनों देश स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टाक रिजॉर्ट में ऐतिहासिक शांति वार्ता के लिए आमने-सामने हैं। 19 जून को होने वाला यह प्रस्तावित समझौता सिर्फ एक कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि भारत के लिए बहुत बड़ी आर्थिक राहत लेकर आ रहा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल और 88% एलपीजी (LPG) आयात करता है। युद्ध के दौरान ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' मार्ग पर पाबंदी लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई थी और कीमतें आसमान छूने लगी थीं। अब इस समझौते के बाद यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे भारत में ईंधन और रोजमर्रा की चीजें सस्ती होने का रास्ता साफ हो गया है।
पेट्रोल, डीजल और एलपीजी
बाजार में कच्चे तेल की प्रचुर उपलब्धता से कीमतें कम होंगी, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम घट सकते हैं। साथ ही एलपीजी का पर्याप्त आयात होने से सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
फल, सब्जी और राशन
डीजल का सीधा संबंध खेती, कोल्ड स्टोरेज और माल ढुलाई से है। डीजल के साथ-साथ खाड़ी देशों से आने वाला फर्टिलाइजर (खाद) सस्ता होने से फल, सब्जियां और खाने-पीने के अन्य सामानों की कीमतें काफी कम हो सकती हैं।
लोन की ईएमआई (EMI) में राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश में चौतरफा महंगाई कम हो सकती है। इससे आरबीआई (RBI) के पास आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती करने का मौका होगा, जिससे आपके होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की EMI सस्ती हो सकती है।
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हवाई सफर
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के दाम घटने से एयरलाइंस कंपनियां हवाई टिकटों के किराए में बड़ी छूट दे सकती हैं।
रोजमर्रा के प्रोडक्ट्स और दवाइयां
पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल (सिंथेटिक रबर, धागे, प्लास्टिक) सस्ते होने से कई सामानों के दाम गिरेंगे। इसमें साबुन, डिटर्जेंट, कोल्ड क्रीम, बॉडी लोशन, लिपस्टिक और काजल, जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, स्पोर्ट्स वियर, कालीन और पर्दे, दवाईयां, सिरिंज, मेडिकल ट्यूब, ग्लूकोज बोतल, दस्ताने और मास्क, फसलों के लिए कीटनाशक और पेस्टिसाइड्स, टायर और ऑटो पार्ट्स सस्ते हो सकते हैं।