
डिजिटल डेस्क। भारत में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार की ओर से BS-6 (भारत स्टेज-6) उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियां बेची जा रही हैं। इसी बीच देश भर के लाखों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार BS-6 वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) बनवाने की समय-सीमा में बड़ी छूट देने की योजना बना रही है।
यदि सरकार का यह नया प्रस्ताव अंतिम रूप से पारित हो जाता है, तो BS-6 वाहन मालिकों को हर साल प्रदूषण केंद्र के चक्कर काटने से निजात मिल जाएगी। आइए जानते हैं कि इस प्रस्तावित मसौदे से किसे और कितना लाभ मिलेगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (मसौदा अधिसूचना) के मुताबिक, BS-6 कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहनों के लिए नियमों में ढील देने की तैयारी है।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि BS-6 कमर्शियल वाहन 6 साल तक पुराना है, तो उसके लिए PUCC की वैधता अवधि को बढ़ाकर 3 साल करने का सुझाव दिया गया है।
हालांकि, वाहनों की उम्र के हिसाब से PUCC रिन्यूअल की प्रक्रिया को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
एक तरफ जहां BS-6 वाहनों को राहत दी जा रही है, वहीं अधिक उत्सर्जन करने वाले पुराने मानकों के वाहनों के लिए नियमों को और कड़ा किया जा रहा है:
भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए वे मानदंड हैं जो वाहनों से निकलने वाले धुएं में मौजूद हानिकारक तत्वों की मात्रा निर्धारित करते हैं। ये मानक यूरोपीय नियमों (Euro Norms) पर आधारित हैं। इनके तहत वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे विषैले तत्वों की सीमा तय की जाती है, ताकि देश की हवा को स्वच्छ रखा जा सके और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाया जा सके।
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