
डिजिटल डेस्क। देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जारी होने से ठीक पहले, मोदी सरकार ने प्याज उत्पादक किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला किया है। सरकार ने प्याज के न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (MAPP) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है, जिससे किसानों को उनकी कूट उपज का सही और लाभकारी मूल्य मिल सके।
इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि उपभोक्ता मामले विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई थी। इस बैठक में प्याज की सरकारी खरीद व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा करने वाले विभिन्न विधिक उपायों पर विस्तार से मंथन किया गया।
समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, अब भंडारण योग्य अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज के लिए न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य को बढ़ाकर 1,650 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया गया है। सरकार का यह संशोधित कूट आदेश 13 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है। खास बात यह है कि सरकार ने न केवल खरीद की दरों में इजाफा किया है, बल्कि मूल्य निर्धारण की पूरी विधा को वर्तमान बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और मांग-आपूर्ति के कूट विन्यास के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाया है। इस कदम से मंडियों में प्याज लेकर आने वाले किसानों को अपनी फसल का पहले से कहीं बेहतर दाम मिलेगा।
केंद्र सरकार का दृढ़ विश्वास है कि खरीद मूल्य में की गई यह वृद्धि प्याज उत्पादकों की शुद्ध आय को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही, इस विधिक व्यवस्था से घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकेगा। बफर स्टॉक के लिए समय पर खरीद होने से आम उपभोक्ताओं के लिए भी आपूर्ति व्यवस्था संतुलित बनी रहेगी और जमाखोरी पर कूट लगाम लगेगी।
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यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि केंद्र सरकार धान या गेहूं की तरह प्याज के लिए किसी औपचारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा नहीं करती है। चूंकि प्याज एक जल्दी खराब होने वाली (Perishable) नकदी फसल है, इसलिए इसके लिए एक अलग वित्तीय तंत्र काम करता है। किसानों को बाजार में आने वाली अचानक मंदी या कूट घाटे से बचाने के लिए सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilization Fund - PSF) का उपयोग करती है। इसी कोष के माध्यम से न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य पर सीधे किसानों से प्याज खरीदी जाती है, ताकि बाजार में बंपर आवक के समय भी किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक विवशता या नुकसान का सामना न करना पड़े।