
डिजिटल डेस्क। विपक्षी दलों के प्रमुख संगठन 'इंडी गठबंधन' की एक महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में सामने आ रही अनियमितताओं और कथित खामियों के खिलाफ एक संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना था। बैठक में गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया और चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आगामी चुनावों को पुरानी बैलेट पेपर (मतपत्र) प्रणाली से कराने की पुरजोर वकालत की।
इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए निम्नलिखित 5 सूत्रीय मांगें प्रस्तुत कीं...
विपक्ष का यह कदम एक अंग्रेजी समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' की हालिया रिपोर्ट के बाद आया है। उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के भीतर 14 बार आधिकारिक रूप से अपनी असहमति जताई थी।
हालांकि, इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार, SIR से संबंधित सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति और सहमति से ही लिए गए थे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश का एक बड़ा वर्ग और राजनीतिक दल वर्तमान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आशंकित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से मतदाता सूची में की जाने वाली हेराफेरी और अचानक किए जाने वाले बदलावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन आयोग की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राहुल गांधी ने पूर्व में विभिन्न राज्यों जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र और कई विधानसभा क्षेत्रों का डेटा साझा करते हुए इन गड़बड़ियों को रेखांकित किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व जनता के भरोसे पर टिका होता है और इस विश्वास को पुनर्स्थापित करने का एकमात्र तरीका मतपत्रों की ओर वापस लौटना और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।
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