
डिजिटल डेस्क, नईदिल्ली। क्या आपने कभी गहरे नीले रंग का शिवलिंग देखा है? मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देश का पहला विशाल ‘नीला शिवलिंग’ तैयार किया जा रहा है। अफगानिस्तान के दुर्लभ लाजावर्त पत्थर से बनने वाला यह शिवलिंग 3 फीट ऊंचा और करीब डेढ़ टन वजनी होगा।
ग्वालियर स्थित रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा इसे आकार दे रहे हैं। इसके लिए अफगानिस्तान से लाजावर्त यानी लैपिस लाजुली का एक विशाल सिंगल पीस पत्थर मंगाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह पत्थर लगभग 5x5 फीट आकार का होगा और इसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई जा रही है। यह पत्थर अपने गहरे नीले रंग, सुनहरी चमक और दुर्लभता के कारण दुनिया भर में विशेष महत्व रखता है। पत्थर के जल्द ही ग्वालियर पहुंचने की उम्मीद है।
पांच देशों के पत्थरों से बनेंगी 70 प्रतिमाएं
यह प्रोजेक्ट केवल शिवलिंग तक सीमित नहीं है। मंदिर के लिए कुल 70 प्रतिमाएं बनाई जानी हैं, जिनमें से 60 प्रतिमाओं का निर्माण ग्वालियर में होगा। इसके लिए भारत, अफगानिस्तान, ब्राजील, सूडान और वियतनाम सहित पांच देशों से विशेष पत्थर मंगाए जा रहे हैं। भगवान गणेश की प्रतिमा सूडान के हरे मर्गज स्टोन से, कार्तिकेय के लिए वियतनाम का ब्लैक मार्बल, नंदी जैसलमेर के गोल्डन स्टोन से और माता पार्वती की प्रतिमा मकराना के सफेद संगमरमर से बनाई जाएगी।
इस विशेष शिवलिंग का डिजाइन इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित संग्रहालय में स्थापित सैंडस्टोन शिवलिंग से प्रेरित है। मंदिर का नाम ‘वंशवृद्धि महादेव मंदिर’ रखा गया है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग संतान प्राप्ति और वंश वृद्धि की आस्था से जुड़ा रहेगा। लाजावर्त का उपयोग प्राचीन काल से आभूषण और पेंटिंग के लिए किया जाता रहा है।