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    मानसून पर अल नीनो का असर! यूपी-बिहार में भीषण गर्मी और कम बारिश का डबल खतरा, IMD ने बताया बचाव का तरीका

    IMD ने मानसून कमजोर रहने और El Niño असर से यूपी-बिहार समेत उत्तर भारत में भीषण गर्मी, कम बारिश, खेती संकट और बिजली मांग बढ़ने की चेतावनी जारी की है।

    By Anurag MishraEdited By: Anurag Mishra
    Publish Date: Fri, 29 May 2026 02:03:47 PM (IST)Updated Date: Fri, 29 May 2026 02:03:47 PM (IST)
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    मानसून पर अल नीनो का असर! यूपी-बिहार में भीषण गर्मी और कम बारिश का डबल खतरा, IMD ने बताया बचाव का तरीका
    मानसून को लेकर नए पूर्वानुमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। (फोटो- एआई जनरेटेड)

    HighLights

    1. El Niño से मानसून कमजोर, कई राज्यों में बारिश घटने की आशंका।
    2. यूपी-बिहार में भीषण हीटवेव, तापमान 46 डिग्री तक पहुंच सकता।
    3. कम बारिश से धान और खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होगी।

    डिजिटल डेस्क। देशभर में भीषण गर्मी के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर नया दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया है, जिसने किसानों से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। IMD के अनुसार जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने पूरे सीजन के लिए 90 प्रतिशत LPA (लॉन्ग पीरियड एवरेज) बारिश का अनुमान जताया है। देश में औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है, ऐसे में इस बार कुल बारिश लगभग 78 सेंटीमीटर रहने की आशंका है।


    मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा अल नीनो भारतीय मानसून को कमजोर कर सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार पर पड़ने की संभावना है। यहां जून के पहले पखवाड़े में भीषण हीटवेव और कम बारिश की स्थिति बन सकती है। तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि रातों में भी गर्मी से राहत मिलने के संकेत नहीं हैं।

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    अल नीनो बना सबसे बड़ा खतरा

    • IMD के डायरेक्टर जनरल डॉ. मृत्युंजय मोहापात्र और सचिव डॉ. एम. रवि चंद्रन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना करीब 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सामान्य तौर पर अल नीनो भारतीय मानसून को कमजोर करता है और उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत में वर्षा कम हो जाती है।

  • मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल-जून 2026 के मौसमी आउटलुक में पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी कि उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से अधिक हीटवेव के दिन देखने को मिल सकते हैं। इस बार दिन ही नहीं, रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बना रहेगा।
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    यूपी-बिहार के किसानों की बढ़ी चिंता

    • उत्तर प्रदेश और बिहार देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल हैं। यहां धान, मक्का, अरहर और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की बुआई मानसून पर निर्भर करती है। यदि जून के शुरुआती दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेती पर सीधा असर पड़ेगा।
    • उत्तर प्रदेश के किसानों का कहना है कि खेतों में नमी खत्म हो चुकी है और बोरिंग का पानी भी गर्म हो रहा है। ऐसे में धान की नर्सरी तैयार करना मुश्किल हो रहा है। बिहार के कई इलाकों में मजदूर और खेतिहर परिवार भीषण गर्मी से परेशान हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।

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    हीटवेव का अलर्ट, रातें भी रहेंगी गर्म

    • IMD के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार 29 मई से 4 जून के बीच पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। कुछ इलाकों में severe heatwave की आशंका भी जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कई स्थानों पर रात का तापमान सामान्य से 1.6 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गर्म रातें स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक होती हैं क्योंकि शरीर को राहत नहीं मिल पाती। इससे बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  • कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

    • कम बारिश और तेज गर्मी का सबसे बड़ा असर खेती और बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि मानसून कमजोर रहा तो सिंचाई की मांग बढ़ेगी, जिससे बिजली खपत में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। पहले से दबाव झेल रहे बिजली वितरण तंत्र पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
    • विशेषज्ञों के अनुसार अगर धान की बुआई देर से हुई या सूखे जैसी स्थिति बनी तो उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। इसका असर खाद्य महंगाई पर भी पड़ सकता है।

    स्वास्थ्य विभाग और सरकार अलर्ट मोड में

    • भीषण गर्मी को देखते हुए NDMA और स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों को हीट स्ट्रोक से निपटने की तैयारी रखने को कहा गया है। NDRF की टीमें भी standby पर रखी गई हैं।
    • राज्य सरकारों को drought-resistant बीज, माइक्रो इरिगेशन और पानी के टैंकरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों के लिए agromet advisory भी जारी की जा रही है।

    जुलाई-अगस्त में मिल सकती है राहत

    • हालांकि मौसम विभाग ने कुछ राहत की उम्मीद भी जताई है। IMD के अनुसार उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से बेहतर बारिश हो सकती है। यदि Indian Ocean Dipole (IOD) मजबूत हुआ तो जुलाई-अगस्त में मानसून की स्थिति सुधर सकती है।

  • फिलहाल केरल में मानसून के समय पर पहुंचने की संभावना है, लेकिन उत्तर भारत तक इसके पहुंचने में देरी हो सकती है। ऐसे में जून का महीना उत्तर भारत के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
  • IMD और NDMA की सलाह

    • दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।
    • ज्यादा पानी और ORS का सेवन करें।
    • हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें।
    • किसान सुबह और शाम खेतों में काम करें।
    • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।