
डिजिटल डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक 'रेसिप्रोकल टैरिफ' (पारस्परिक शुल्क) समझौते ने देश के मध्यम वर्ग और टेक प्रेमियों के लिए बड़ी राहत के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद हुए इस समझौते से न केवल 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए अमेरिका के दरवाजे खुले हैं, बल्कि भारत में भी विदेशी गैजेट्स और खाने-पीने की चीजों के दाम कम होने का रास्ता साफ हो गया है।
इस ट्रेड डील का सबसे बड़ा असर आपके 'डिजिटल बजट' पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से आने वाले या अमेरिकी तकनीक से जुड़े लैपटॉप, मोबाइल गैजेट्स, और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के पार्ट्स पर आयात शुल्क कम होगा। इससे एप्पल (Apple), डेल (Dell) और एचपी (HP) जैसे ब्रांड्स के उत्पादों की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरणों के अमेरिकी पार्ट्स सस्ते होने से इनकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी घटेगी।
पीएम मोदी ने इस डील को भारत के 1.4 अरब लोगों की जीत बताया है। अब अमेरिका में भारतीय सामान पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। इसका सीधा फायदा इन क्षेत्रों को मिलेगा:
भले ही उपभोक्ता सामान सस्ते हो रहे हैं, लेकिन कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में चुनौती बनी रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे उत्पादों पर अभी भी करीब 50% तक की भारी ड्यूटी लग सकती है। इसी तरह, कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर भी पुराने टैरिफ जारी रहने की आशंका है।
इस समझौते की एक बड़ी शर्त यह भी मानी जा रही है कि भारत अब रूस से तेल की खरीद कम करेगा और इसकी भरपाई अमेरिका व वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाकर की जाएगी।
यह भी पढ़ें- US Tariff: भारत को 'छूट', पड़ोसियों को 'चोट'... ट्रंप ने दिखाई दोस्ती, चीन-पाकिस्तान देखते रह गए!
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राष्ट्रपति ट्रंप को 'प्रिय मित्र' संबोधित करते हुए लिखा कि
"यह जानकर खुशी हुई कि अब 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद।"