सैन्य खर्च में भारत की लंबी छलांग, दुनिया में 5वें स्थान पर बरकरार, जानें अमेरिका से लेकर पाकिस्तान किस नंबर पर
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सीमाई चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने के लिए खजाना खोल दिया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 28 Apr 2026 05:00:21 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Apr 2026 05:00:21 PM (IST)
भारत ने सीमा सुरक्षा के लिए खोला अपना खजाना।HighLights
- भारत ने सीमा सुरक्षा के लिए खोला अपना खजाना
- ₹7.85 लाख करोड़ के साथ होगा आधुनिकीकरण
- फ्रांस और अमेरिका बने नए रणनीतिक साझेदार
डिजिटल डेस्क। दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सीमाई चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने के लिए खजाना खोल दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य खर्च के मामले में भारत ने वैश्विक पटल पर अपना 5वां स्थान बरकरार रखा है। वर्ष 2025 में भारत का रक्षा बजट न केवल बढ़ा है, बल्कि हथियारों की खरीद के मामले में भी रणनीतिक बदलाव देखे गए हैं।
सैन्य खर्च में भारत की 'हाई जंप'
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2025 में अपनी सुरक्षा पर 92.1 बिलियन डॉलर खर्च किए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक स्तर पर हो रहे कुल सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी अब 3.2 प्रतिशत हो गई है।
दुनिया के टॉप 5 सैन्य खर्च करने वाले देश:
- अमेरिका
- चीन
- रूस
- जर्मनी
- भारत
रूस से दूरी, फ्रांस-अमेरिका से नजदीकी
SIPRI की रिपोर्ट में भारत के हथियार खरीद पैटर्न में एक बड़ा बदलाव रेखांकित किया गया है। भारत अब अपनी जरूरतों के लिए केवल एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता:
- रणनीतिक बदलाव: भारत अब रूस से अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर रहा है और फ्रांस, इजरायल व अमेरिका के साथ बड़े रक्षा सौदे कर रहा है।
- रूस अब भी शीर्ष पर: हालांकि अन्य देशों से खरीद बढ़ी है, लेकिन अब भी रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
- बजट 2026: भारत सरकार ने अपनी सेनाओं को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार करने हेतु 1 फरवरी 2026 के बजट में 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
पड़ोसियों का हाल और 'ऑपरेशन सिंदूर' का असर
भारत का रक्षा खर्च काफी हद तक चीन और पाकिस्तान के साथ जारी तनाव पर केंद्रित है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद के जरिए अपनी युद्धक क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया है।
- चीन: 336 बिलियन डॉलर के खर्च के साथ चीन दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- पाकिस्तान: आर्थिक तंगी के बावजूद पाकिस्तान ने अपना सैन्य खर्च बढ़ाकर 11.9 बिलियन डॉलर कर लिया है और वह वैश्विक सूची में 31वें स्थान पर है।
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नाटो और यूरोप में मची होड़
भारत के अलावा यूरोप में भी हथियारों की होड़ तेज हुई है। यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण यूरोप का सैन्य खर्च 14% बढ़कर 864 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेष रूप से पोलैंड, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे नाटो (NATO) देशों ने अपने रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है।