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ISRO की बड़ी कामयाबी: GSLV-F17 के साथ लॉन्च हुआ 'बाज' सैटेलाइट EOS-05, जानिए मिशन की खासियत और आगे की तैयारी

ISRO ने शुक्रवार तड़के श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 07:33:01 AM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 07:40:34 AM (IST)
ISRO की बड़ी कामयाबी: GSLV-F17 के साथ लॉन्च हुआ 'बाज' सैटेलाइट EOS-05, जानिए मिशन की खासियत और आगे की तैयारी
GSLV-F17 ने सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. EOS-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर कक्षा मिली
  2. EOS-05 करीब 36,000 किलोमीटर ऊंचाई से निगरानी करेगा
  3. गगनयान के पहले मानवरहित मिशन की तैयारी जारी

डिजिटल डेस्क, श्रीहरिकोटा | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार तड़के एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 के साथ सफल उड़ान भरी।

रॉकेट ने भारतीय समयानुसार सुबह 2:55 बजे उड़ान भरी। प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद EOS-05 को उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

सटीक कक्षा में पहुंचा EOS-05

मिशन की सफलता के बाद ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि GSLV-F17 ने उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 को सटीक तरीके से आवश्यक कक्षा में स्थापित किया है। EOS-05 को जियो-इमेजिंग उपग्रह के रूप में विकसित किया गया है।


मिशन के जरिए भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह उपग्रह पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से भारत का निरंतर विहंगम दृश्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।

GSLV का 19वां मिशन, सबसे भारी उपग्रह

मिशन निदेशक थॉमस कुरियन ने इसे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए गर्व का क्षण बताया। उनके अनुसार, GSLV ने अपना 19वां मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया है।

उन्होंने बताया कि EOS-05 एक विशिष्ट संरचना वाला पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो लगभग वास्तविक समय में इमेजिंग करने में सक्षम है। उनके मुताबिक, यह GSLV द्वारा GTO या सब-GTO कक्षा में प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। उन्होंने यह भी कहा कि रॉकेट का प्रक्षेपण कुछ ही मिनटों में पूरा होता है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिकों और तकनीकी टीमों की महीनों और वर्षों की मेहनत होती है।

51.7 मीटर ऊंचा है GSLV-F17

GSLV-F17 प्रक्षेपण यान की ऊंचाई 51.7 मीटर है, जबकि इसका लिफ्टऑफ द्रव्यमान 420.5 टन है। इन क्षमताओं के कारण यह भारत के सबसे बड़े परिचालन प्रक्षेपण यानों में शामिल है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी मिशन की सफलता पर ISRO को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही हैं और इससे वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में देश की स्थिति और मजबूत हो रही है।

Mission Success!

GSLV-F17 has successfully accomplished its mission, placing EOS-05 into the intended orbit.

Sharing a few memorable moments from the lift-off.

For more information:https://t.co/VneB2jgZoY#GSLVF17 #EOS05 #ISRO pic.twitter.com/kv0zB6V5Vi

— ISRO (@isro) September 3, 2026

गगनयान मिशन पर भी तेज हुई तैयारी

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने गगनयान मिशन को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कैलेंडर वर्ष में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण के लिए जोरदार और व्यवस्थित तरीके से काम चल रहा है।

नारायणन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इस वित्तीय वर्ष में नेविगेशन उपग्रह NVS-03 सहित छह और उपग्रह प्रक्षेपण का लक्ष्य रखा गया है।