
डिजिटल डेस्क। भारत में पहली बार कुख्यात ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टागॉन (Captagon) की एक बड़ी खेप पकड़कर सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक गुप्त और बड़े एक्शन ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत करीब 182 करोड़ रुपये मूल्य की इस सिंथेटिक ड्रग को जब्त करने में सफलता हासिल की है। यह पूरी खेप भारत के रास्ते मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों में तस्करी की जानी थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इस कामयाबी की घोषणा करते हुए इसे ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ (नशामुक्त भारत) के संकल्प की ओर एक ऐतिहासिक कदम बताया।
गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा योद्धाओं की पीठ थपथपाते हुए कहा:
मध्य पूर्व भेजे जाने वाले इस बड़े ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के खिलाफ हमारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जीता-जागता उदाहरण है। हमारी जमीन का इस्तेमाल कर भारत के रास्ते बाहर भेजे जाने वाले या देश में आने वाले हर एक ग्राम ड्रग्स पर हमारी पैनी नजर है। एनसीबी के चौकस जांबाजों को इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई।
वैज्ञानिक और तकनीकी भाषा में कैप्टागॉन का असली नाम फेनेथिलीन (Fenethylline) है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली सिंथेटिक स्टिमुलेंट (उत्तेजक ड्रग) है।
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यह कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक नाम नहीं है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा दिया गया एक शब्द है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट के कई खतरनाक आतंकवादी संगठन अपने लड़ाकों को युद्ध के मैदान में उतारने से पहले इस ड्रग की खुराक देते हैं।
दिमाग पर इसका असर:
मूल रूप से कैप्टागॉन को 1960 के दशक में कुछ खास मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए एक वैध दवा के रूप में विकसित किया गया था। लेकिन इसके भयानक साइड इफेक्ट्स और लत लगने की अत्यधिक क्षमता को देखते हुए 1980 के दशक तक दुनिया के अधिकांश देशों में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया।
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वर्तमान में इसका वैध उत्पादन बंद है, लेकिन यूरोप और मध्य-पूर्व के कुछ अशांत इलाकों में इसका अवैध प्रोडक्शन (Illegal Manufacturing) तेजी से बढ़ा है। कम लागत में तैयार होने और भारी मुनाफे के कारण इसे अंडरवर्ल्ड में 'गरीब आदमी का कोकीन' भी कहा जाता है।
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अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने कैप्टागॉन के व्यापार को मौजूदा वक्त में सबसे तेजी से उभरते हुए वैश्विक खतरों में से एक माना है। इस नेटवर्क को चलाने के लिए अपराधी निम्नलिखित आधुनिक तौर-तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं:
भारत में इस पहली बड़ी बरामदगी के बाद अब एनसीबी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार देश के किन-किन राज्यों या लोकल कूरियर एजेंटों से जुड़े हुए थे।
(समाचार एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)