
डिजिटल डेस्क। घरेलू गैस सिलेंडर (LPG) का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। केंद्र सरकार ने गैस सब्सिडी के नियमों को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपना लिया है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण उपजे वैश्विक 'होर्मुज संकट' और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच, सरकार ने अब टैक्स रिकॉर्ड के आधार पर सब्सिडी की पात्रता जांचने के लिए SMS अलर्ट भेजना शुरू कर दिया है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य एलपीजी सब्सिडी के लाभ से संपन्न वर्ग को बाहर कर केवल आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक इसका फायदा पहुंचाना है। इस मुहिम के तहत उन उपभोक्ताओं को सीधे निशाने पर लिया गया है जिनकी सालाना टैक्सेबल इनकम 10 लाख रुपये से अधिक है।
सरकार द्वारा भेजे जा रहे मैसेज में उपभोक्ताओं को कड़ी चेतावनी दी गई है। जिन लोगों के पास यह अलर्ट आया है, उन्हें 7 दिनों के भीतर अपनी आय का ब्यौरा देना होगा या अपनी पात्रता स्पष्ट करनी होगी। यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो उसकी गैस सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। साथ ही, गलत जानकारी देकर सब्सिडी का लाभ लेने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी है।
सब्सिडी की पात्रता जांचने के लिए सरकार ने एक एडवांस 'ट्रिपल-चेक' सिस्टम तैयार किया है। इसमें डेटा के मिलान के लिए निम्नलिखित कड़ियों को जोड़ा गया है:
यह नियम केवल कनेक्शन धारक पर ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के अन्य सदस्यों की कुल आय पर भी लागू हो सकता है।
यदि आपको सरकार की ओर से ऐसा कोई मैसेज प्राप्त हुआ है या आप अपनी पात्रता सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सरकार सब्सिडी के बोझ को कम कर इसे लक्षित लाभार्थियों तक ही सीमित रखना चाहती है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि संपन्न वर्ग को सब्सिडी का लाभ लेने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।