महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर से मची उथल-पुथल, जानें उद्धव के सांसदों की मीटिंग बुलाने के बाद से अब तक का अपडेट
उद्धव ठाकरे गुट के 6-7 सांसदों के शिंदे शिवसेना में जाने की अटकलों के बीच दिल्ली में अहम बैठक बुलाई गई है। संजय राउत ने सांसदों की खरीद-फरोख्त
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 02:11:47 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 02:21:41 PM (IST)
उद्धव गुट के सांसद शिंदे गुट की शिवसेना का हाथ थाम सकते हैं। (फाइल फोटो)HighLights
- उद्धव गुट के 6-7 सांसदों की बगावत की चर्चा।
- दिल्ली में उद्धव ठाकरे ने आपात बैठक बुलाई।
- सभी सांसदों को व्हिप जारी कर हाजिरी अनिवार्य।
डिजिटल डेस्क। भारतीय राजनीति में इस समय सांसदों के बागी होने का दौर चल रहा है। टीएमसी के बाद उद्धव ठाकरे गुट के 6 से 7 सांसद भी बागी हो सकते हैं। वह शिंदे गुट की शिवसेना का हाथ थाम सकते हैं। घबराए उद्धव ने दिल्ली में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की मानें, तो सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। मीटिंग में अनिवार्य रूप से आने को कहा गया है। न आने वाले सांसदों के खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन की कार्रवाई भी हो सकती है।
ऐसा लग रहा है कि 2022 खुद को दोहरा रहा है। ऐसा ही व्हिप तब भी जारी किया गया था, तब पार्टी के 39 विधायक बगावत कर गए थे और एकनाथ शिंदे से जाकर मिल गए थे।
इस पूरे घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर नाम से पुकारा जा रहा है। इसको लीड महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना चीफ एकनाथ शिंदे लीड कर रहे हैं।
दिल्ली पहुंचे UBT सांसद, उद्धव मनाने की कोशिश में जुटे
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 6 से 7 बागी सांसद दिल्ली मंगलवार रात को ही पहुंच गए हैं। उनकी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात हो सकती है। दिलचस्प बात ये है कि एकनाथ शिंदे भी दिल्ली में ही डटे हुए हैं। उद्धव गुट लगातार बागी सांसदों से बात करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनको मनाया जा सके, लेकिन संपर्क ही नहीं हो पा रहा है।
राउत ने 50-50 करोड़ रुपये ऑफर होने का लगाया आरोप
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सांसदों की बोली लग रही है। हर एक सांसद को 50-50 करोड़ रुपये ऑफर किए जा रहे हैं। इसके अलावा 15 करोड़ का एडवांस भी है।
स्पीकर बागी गुट न दें मान्यता
उद्धव गुट से सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि अलग होने वाला कोई भी गुट पार्टी प्रतिनिधि नहीं हो सकता है। सदन में नेता, व्हिप और विधायी गतिविधियों से जुड़े अधिकार राजनीतिक दल से आते हैं। विधायक दल का इसमें कोई रोल नहीं होता है। ऐसे में किसी भी गुट को पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता न दी जाए।