'जब न्याय नहीं मिलता, तब लगता है न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है', SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की तीखी दलीलें
SIR in Supreme Court: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत निर्वाचन ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 04 Feb 2026 04:02:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Feb 2026 04:25:40 PM (IST)
SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की तीखी दलीलेंHighLights
- सीएम ने कहा, मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं
- SIR प्रक्रिया केवल नाम हटाने का माध्यम बन गई है
- बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया?
डिजिटल डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है।
इस याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब न्याय नहीं मिलता, तब लगता है कि न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है।
मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य ने अपने संवैधानिक अधिकार के तहत याचिका दायर की है और राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रक्रियात्मक कठिनाइयों तथा वास्तविक निवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंकाओं को स्पष्ट रूप से रखा है।
मैं आपकी कृपा से यहां उपस्थित हूं
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न्यायालय को संबोधित करते हुए कहा, मैं आपकी कृपा से यहां उपस्थित हूं। न्यायाधीशों को मेरा प्रणाम और विरोधी पक्ष के वकीलों को भी मेरा सम्मान।
समस्या यह है कि जब सब कुछ समाप्त हो जाता है और हमें न्याय नहीं मिलता, तब लगता है कि न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है। मैंने चुनाव आयोग को कई पत्र लिखे हैं। मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं और न ही मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।
SIR प्रक्रिया पर ममता बनर्जी के सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR प्रक्रिया केवल नाम हटाने का माध्यम बन गई है। नामों में विसंगतियां केवल उपनाम तक सीमित नहीं हैं। यह पूरी प्रक्रिया अव्यवस्थित है। उदाहरण के तौर पर, शादी के बाद यदि कोई बेटी पति का उपनाम अपनाती है, तो क्या इसे विसंगति माना जाएगा? इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता।
बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि कुछ बेटियां शादी के बाद ससुराल चली गईं और उनके नाम सूची से हटा दिए गए। कई गरीब लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं।
बंगाल के लोग इस बात से संतुष्ट हैं कि इस न्यायालय ने आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया। अन्य राज्यों के निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र भी मान्य हैं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले केवल बंगाल को निशाना बनाया गया।
24 साल बाद इतनी जल्दबाजी क्यों?
उन्होंने सवाल उठाया, चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। 24 साल बाद इतनी जल्दबाजी क्यों? महज तीन महीनों में यह प्रक्रिया क्यों पूरी की जा रही है, वह भी फसल कटाई के मौसम में, जब लोग यात्रा कर रहे हैं? इस दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत हुई, बीएलओ की भी मृत्यु हुई और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। फिर असम में ऐसा क्यों नहीं?