बाढ़ में खराब हुआ शराब का स्टॉक, 1.20 करोड़ का क्लेम रिजेक्ट करने पर बीमा कंपनी को ब्याज समेत भुगतान का आदेश
मुंबई में बाढ़ से खराब शराब स्टॉक का बीमा क्लेम ठुकराना कंपनी को महंगा पड़ा। उपभोक्ता आयोग ने 1.20 करोड़ रुपये, ब्याज और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 05:39:20 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 05:39:20 PM (IST)
शराब व्यापारी को मिला इंश्योरेंस का पैसा। (एआई जनरेटेड)HighLights
- बाढ़ में शराब का स्टॉक पूरी तरह खराब।
- बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार।
- सर्वेयर ने नुकसान का दावा सही माना।
डिजिटल डेस्क। अगर आपने अपने व्यापार के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। अक्सर देखा जाता है कि नुकसान के बाद बीमा कंपनियां कई तरह की तकनीकी खामियां निकालकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं। लेकिन मुंबई के एक शराब कारोबारी के मामले में दक्षिण मुंबई उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह कारोबारी को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 1.20 करोड़ रुपये से अधिक का बीमा क्लेम चुकाए। यह मामला 2017 की मुंबई बाढ़ से जुड़ा है, जब गोदाम में पानी भरने से करोड़ों की शराब खराब हो गई थी।
2017 की बारिश में डूब गया था करोड़ों का स्टॉक
- कुर्ला इलाके में शराब के होलसेल व्यापारी का एक बड़ा गोदाम था। अगस्त 2017 में मुंबई में आई भयंकर बारिश और बाढ़ के कारण इस गोदाम में पानी भर गया। इस जलभराव की वजह से शराब की बोतलों पर लगे ढक्कनों में भारी जंग लग गई और उनके लेबल पूरी तरह गल गए।
- उत्पाद इस स्थिति में नहीं बचे थे कि उन्हें बाजार में बेचा जा सके। हालात को देखते हुए राज्य के आबकारी (एक्साइज) विभाग की मौजूदगी में पूरे खराब हो चुके स्टॉक को अनुपयोगी मानकर नष्ट कर दिया गया।
बीमा कंपनी ने अपनी ही सर्वे रिपोर्ट को किया दरकिनार
- व्यापारी ने भारी नुकसान की भरपाई के लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में अपना दावा पेश किया। बीमा कंपनी के अधिकृत सर्वेयर ने भी अपनी जांच में पाया कि लगभग 1.20 करोड़ रुपये का वास्तविक नुकसान हुआ है और उसने भुगतान की सिफारिश भी की।
लेकिन, जनवरी 2020 में कंपनी ने क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कारोबारी ने शराब खराब होने की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट और स्टॉक नष्ट करने की वीडियो रिकॉर्डिंग जमा नहीं की। दूसरी ओर, आबकारी विभाग का स्पष्ट कहना था कि ऐसे मामलों में उनकी तरफ से कोई लैब सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता। उपभोक्ता फोरम ने माना 'सेवा में कमी'
दक्षिण मुंबई उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीमा कंपनी के रवैये को मनमाना और 'सेवा में कमी' करार दिया। फोरम ने स्पष्ट किया कि सर्वेयर की ठोस रिपोर्ट को बिना किसी वैध कारण के खारिज करना पूरी तरह गलत है।
आयोग का अंतिम आदेश
- कंपनी को 1,20,12,403 रुपये का क्लेम 9% सालाना ब्याज के साथ चुकाना होगा।
- कारोबारी को हुई मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा अलग से दिया जाए।
- अदालती और कानूनी खर्च के तौर पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
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