
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली। नीट प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले रद माने जाएंगे। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश केंद्र सरकार के उस आश्वासन के बाद आया, जिसमें 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने की बात कही गई थी। केंद्र ने यह भी भरोसा दिलाया था कि भविष्य में इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एक FIR पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है। ये वे लोग हैं, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली पुलिस सहित बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सरकारों ने छात्रों पर दर्ज FIR रद करने की याचिकाएं दायर की हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास के साथ हुई बातचीत की सराहना की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दोनों पक्षों ने सकारात्मक रुख अपनाया है और वे कोई दुश्मन नहीं हैं।
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने कोर्ट और दोनों पक्षों के वकीलों का आभार जताते हुए आदेश के समय पर पालन की उम्मीद जताई।
NEET-UG 2026 परीक्षा रद होने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार मुआवजा देने के वादे पर कायम है, लेकिन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए तीन महीने का समय चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।