पश्चिम एशिया संकट के बीच गैस आपूर्ति का नया प्रबंधन, घरेलू एलपीजी और सीएनजी को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता
पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार ने गैस आपूर्ति की प्राथमिकताएं बदलीं। घरेलू एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जबकि कमर्शियल ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 11 Mar 2026 10:28:57 AM (IST)Updated Date: Wed, 11 Mar 2026 12:04:11 PM (IST)
घरेलू एलपीजी और सीएनजी को मिली सर्वोच्च प्राथमिकताHighLights
- सरकार ने गैस आवंटन व्यवस्था में नया बदलाव किया।
- 33 करोड़ घरेलू एलपीजी कनेक्शनों को पहली प्राथमिकता।
- उर्वरक उद्योग को कम से कम 70% गैस आपूर्ति।
डिजिटल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस के उपयोग की प्राथमिकताओं को दोबारा तय कर दिया है। सरकार ने घरेलू रसोई गैस (एलपीजी), सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस (पीएनजी) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जिससे घरों और परिवहन क्षेत्र में किसी प्रकार की कमी न हो। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नया आदेश जारी किया है।
इस फैसले के बाद गैस आवंटन व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस का हिस्सा घटाकर उसे जरूरी क्षेत्रों की ओर मोड़ा जा रहा है। सरकार ने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखना इस समय सबसे जरूरी है।
33 करोड़ घरेलू कनेक्शनों तक आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर
- सरकार की पहली प्राथमिकता देश के लगभग 33 करोड़ घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शनों तक नियमित आपूर्ति बनाए रखना है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत की गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। इसी कारण गैस आवंटन की व्यवस्था में पुनर्गठन किया गया है।
- सरकार ने कहा कि देश में गैस की कुल उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त है, लेकिन अनिश्चित वैश्विक हालात को देखते हुए आवश्यक क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है।
एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी को प्राथमिकता
- नई व्यवस्था के अनुसार उपलब्ध एलएनजी का उपयोग सबसे पहले एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। सरकार ने इन क्षेत्रों की औसत छह महीने की मांग को शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इसके बाद उर्वरक उद्योग को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां कम से कम 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से घरेलू उपभोक्ताओं और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ने वाले संभावित संकट को टाला जा सकेगा। ![naidunia_image]()
एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
- पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने रिफाइनरियों को भी एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अतिरिक्त गैस फीडस्टॉक के उपयोग की अनुमति दी गई है।
- इस कदम का असर भी देखने को मिला है। अधिकारियों के अनुसार पिछले दो दिनों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी समिति
- एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया है। इस समिति में सरकारी क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।
- यह समिति विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली गैस मांग का आकलन करेगी और उसी के आधार पर गैस आवंटन का निर्णय लिया जाएगा। साथ ही सरकार ने गैस आपूर्ति के नए प्रबंधन को लागू करने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी गेल लिमिटेड को सौंपी है, जो प्राथमिकता सूची के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में गैस वितरण को नियंत्रित करेगी। स्थिति सामान्य होने के बाद गैस आपूर्ति से जुड़े मूल वाणिज्यिक अनुबंधों को फिर से लागू किया जा सकता है।
कमर्शियल गैस की कमी से होटल उद्योग चिंतित
- इस बीच देश के कई हिस्सों से एलपीजी वितरक एजेंसियों द्वारा गैस आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कई शहरों में कामर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है।
- तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने कमर्शियल गैस की कमी की शिकायत की है। बेंगलुरू से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
भारत में रोजाना 19 करोड़ घन मीटर गैस की खपत
- भारत में प्राकृतिक गैस की खपत लगभग 19.1 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से करीब आधी जरूरत आयातित एलएनजी के माध्यम से पूरी होती है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका असर भारत की गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश में गैस की उपलब्धता को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आने दी जाए। सरकार ने राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर रसोई गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके।