ऑपरेशन सिंदूर के बाद कैसे बदली भारत की सैन्य रणनीति, अब तैयार होगी 50 हजार जवानों की ड्रोन फोर्स
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर नई रक्षा रणनीति पेश करते हुए 50 हजार जवानों की ड्रोन फोर्स, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और मल्टी-डोमेन युद्ध तैयारी पर ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 07 May 2026 12:43:15 PM (IST)Updated Date: Thu, 07 May 2026 12:52:43 PM (IST)
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर युद्ध रणनीति का नया खाका दुनिया के सामने रखा है। (फोटो- एआई जनरेटेड)HighLights
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद विशेष ड्रोन फोर्स तैयार की जाएगी।
- 50 हजार जवानों को आधुनिक युद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- ब्रह्मोस मिसाइल में स्वदेशी तकनीक का उपयोग बढ़ा है।
डिजिटल डेस्क। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर अपनी सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता और भविष्य की युद्ध रणनीति का नया खाका दुनिया के सामने रखा है। पिछले वर्ष 6 से 10 मई के बीच चले 88 घंटों के इस सैन्य अभियान ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से बैकफुट पर ला दिया था। भारतीय रक्षा तंत्र को भी पूरी तरह बदलने की दिशा भी दे दी। अब भारत पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर ड्रोन, साइबर और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर के युग में प्रवेश कर चुका है।
50 हजार जवानों की विशेष ड्रोन फोर्स तैयार
- ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के बाद भारतीय सेना ने 50 हजार जवानों की एक विशेष ड्रोन फोर्स तैयार करने का फैसला लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य अभियान में सबसे पहले मोर्चा संभालेगी। रक्षा मुख्यालय के अनुसार अगले तीन वर्षों में 15 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, जहां जवानों को वर्चुअल रियलिटी और सिम्युलेटर के जरिए आधुनिक युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सेना की योजना है कि हर कोर में लगभग 8 हजार ड्रोन शामिल किए जाएं। भविष्य में बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे अर्धसैनिक बलों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सेना अब ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जहां हर सैनिक के पास व्यक्तिगत ड्रोन उपलब्ध हो। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर जोर
- बीते एक वर्ष में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। देश का कुल रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि ब्रह्मोस मिसाइल के स्वदेशीकरण को माना जा रहा है। वर्ष 2015 तक इसमें केवल 15 प्रतिशत भारतीय पुर्जे इस्तेमाल होते थे, जबकि अब यह आंकड़ा 72 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
मिसाइल के इंजन और सीकर जैसे महत्वपूर्ण उपकरण अब भारतीय कंपनियां तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही एआई, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 120 नए डिफेंस स्टार्टअप सामने आए हैं, जिन्हें हजारों एमएसएमई का सहयोग मिल रहा है। भविष्य के युद्ध होंगे मल्टी-डोमेन
- रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले युद्ध केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे। अब युद्ध साइबर स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क और अंतरिक्ष तक फैल चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने कम्युनिकेशन सिस्टम को और मजबूत बना रहा है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में ऐसे ड्रोन इस्तेमाल होंगे, जिन्हें जाम करना बेहद कठिन होगा। ये ड्रोन बिना जीपीएस के भी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीक से लक्ष्य भेद सकेंगे और झुंड में हमला करने में सक्षम होंगे। इसी खतरे को देखते हुए भारत अपनी एंटी-ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।
88 घंटों में पाकिस्तान हुआ बैकफुट पर
- ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 6 और 7 मई की मध्यरात्रि में हुई थी। भारतीय वायुसेना ने महज 23 मिनट में पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में करीब 100 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसके जवाब में पाकिस्तान ने 8 मई को गुजरात से कच्छ तक करीब 1000 ड्रोन से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने 98 प्रतिशत ड्रोन हवा में ही नष्ट कर दिए। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के चार एयर डिफेंस सिस्टम और एक रडार को तबाह कर दिया।
इसके बाद 9 मई को भारतीय सेना ने सुखोई लड़ाकू विमानों और ड्रोन की मदद से ब्रह्मोस मिसाइलें दागकर पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया। लगातार हो रहे हमलों से दबाव में आए पाकिस्तान ने 10 मई को भारत से युद्ध रोकने की अपील की। इसके साथ ही भारत ने बिना किसी बाहरी मध्यस्थता के अपनी सैन्य और कूटनीतिक बढ़त साबित कर दी।