
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह करने का फैसला किया है कि वे कुछ राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएं। ये अधिकारी अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को छात्रवृत्ति देने में हुई देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के सामने पेश नहीं हुए थे।
उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और बिहार के मुख्य सचिवों को समिति के सामने पेश होना था। उन्हें यह बताना था कि अनुसूचित जाति के छात्रों को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति देने में इतने वर्षों की देरी क्यों हुई। हालांकि, उनमें से कोई भी पेश नहीं हुआ।
पीएसी (PAC) के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि समिति के ऑडिट में पता चला है कि छात्र प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 48 महीने तक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ छात्रों को तो कुछ भी नहीं मिला है।
वेणुगोपाल ने 'X' पर बताया है कि आय और जाति की पात्रता की जांच नहीं की गई और भुगतान उन लोगों को मिल गया जो अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते थे, जबकि पात्र बच्चे इंतजार करते रह गए। उन्होंने कहा कि इसी वजह से खराब प्रदर्शन करने वाले छह राज्यों के शीर्ष नौकरशाहों को तलब किया गया था।
उन्होंने कहा, समिति ने इसे गंभीरता से लिया है और इसे विशेषाधिकार नियमों के तहत कार्रवाई के लिए माननीय अध्यक्ष के संज्ञान में लाएगी।
वेणुगोपाल ने कहा, एक दलित बच्चे के लिए छात्रवृत्ति यह तय करती है कि वह अपनी पढ़ाई जारी रख पाएगा या नहीं। पीएसी सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने को अपना संवैधानिक कर्तव्य मानती है। जब तक हर पात्र छात्र को उसका हक नहीं मिल जाता, तब तक समिति हर राज्य और मंत्रालय को जवाबदेह ठहराएगी।
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए वेणुगोपाल ने बताया कि ऑडिट में सामने आया है कि 2017 से 2022 के बीच प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में चार साल से ज्यादा और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में लगभग सात साल की देरी हुई है। उन्होंने कहा, यह हम सभी के लिए चौंकाने वाला था।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कोई तालमेल नहीं था और न ही राज्यों ने इन मामलों को कोई प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, तीन महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) नहीं दी है। यह एक गंभीर मामला है।
अध्यक्ष ने कहा कि समिति ने मुख्य सचिवों के उपस्थित न होने का गंभीर संज्ञान लिया है और सर्वसम्मति से उनके खिलाफ अध्यक्ष (स्पीकर) के समक्ष विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। पीएसी (PAC) अध्यक्ष ने कहा कि समिति इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएगी। अधिकारी किसी भी योजना के लिए इतनी देरी नहीं कर सकते।
वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा, इसलिए पीएसी इसे बड़े स्तर पर उठाएगी और हम संसद में रिपोर्ट पेश करेंगे। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए। हमने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय सचिव के साथ इस पर विस्तार से चर्चा की है।