
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं के विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजधानी दिल्ली में माहौल सामान्य होने लगा है। जंतर-मंतर पर एकत्र प्रदर्शनकारियों से पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौटने की अपील की है। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा करते हुए प्रदर्शनकारियों से स्थल खाली करने का अनुरोध किया, जिसके बाद भीड़ धीरे-धीरे हटने लगी है।
प्रदर्शनकारियों और आम यात्रियों को सुगमता से उनके गंतव्य तक पहुंचाने तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली मेट्रो ने मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सड़कों पर यातायात सुचारू रूप से चलाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल है और किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने स्थिति नियंत्रण में आने के बाद बड़ा अपडेट साझा किया। सुरक्षा कारणों से बंद किए गए प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को आम जनता के लिए पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। शनिवार दोपहर राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय (Central Secretariat) स्टेशनों के सभी प्रवेश द्वार यात्रियों के लिए खोल दिए गए। दोपहर बाद स्टेशनों के गेट खुलते ही यात्रियों का आवागमन फिर से सामान्य रूप से शुरू हो गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को इस्तीफा देने के तुरंत बाद केंद्र सरकार और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे चरण की अहम बैठक शुरू हो गई। पूर्व की दो वार्ताओं के बाद बुलाई गई इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बैठक में आंदोलन से जुड़े मुख्य बिंदुओं और छात्रों की शेष मांगों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र आते ही प्रदर्शनकारी छात्रों और सीजेपी कार्यकर्ताओं के चेहरे खिल उठे। आंदोलन के केंद्र बिंदु जंतर-मंतर पर विजय का माहौल देखने को मिला। जंतर-मंतर पर डटे युवाओं और छात्रों ने नाच-गाकर और नारेबाजी करके अपनी इस सफलता का जश्न मनाया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसे जन-आंदोलन की पहली बड़ी ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि "यह जनता की अटूट एकजुटता का ही परिणाम है कि सरकार को झुकना पड़ा।"