
डिजिटल डेस्क। रेलवे बोर्ड ने अपने कर्मचारियों के सामाजिक और स्वास्थ्य हित में कदम उठाते हुए लीव रूल्स (अवकाश नियमों) में व्यापक संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत चाइल्ड केयर लीव (CCL) तथा ऑन-ड्यूटी चोट या बीमारी के लिए मिलने वाली छुट्टियों की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और कर्मचारी-अनुकूल बना दिया गया है।
रेलवे बोर्ड ने इस संदर्भ में भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC) के अध्याय-5 में जरूरी संशोधन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
जारी संशोधित नियमों के अनुसार, महिला रेल कर्मी अपनी संपूर्ण सेवा अवधि (सर्विस टैन्योर) के दौरान कुल 730 दिनों (2 वर्ष) तक की चाइल्ड केयर लीव ले सकती हैं। इस अवकाश को एकमुश्त लेने के बजाय आवश्यकतानुसार अलग-अलग किस्तों में लिया जा सकेगा।
बच्चों की पढ़ाई, वार्षिक परीक्षाओं, बीमारी या उनकी देखरेख से जुड़ी अन्य प्राथमिकताओं के लिए यह लीव दी जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इन नियमों को केंद्र सरकार के सीसीएस (लीव) रूल्स के समकक्ष लाकर लागू किया है।
अवकाश नियमों में दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने या कार्य-संबंधित बीमारी से पीड़ित होने वाले कर्मचारियों के लिए किया गया है। रेलवे ने पुराने विशेष विकलांगता अवकाश (SDL) और हॉस्पिटल लीव को समाप्त कर 'वर्क रिलेटेड इलनेस एंड इंजरी लीव' (WRIL) नाम से एकीकृत व्यवस्था शुरू की है।
रेलवे बोर्ड का कहना है कि इन नए नियमों का मुख्य ध्येय केंद्रीय कर्मचारियों के समान सुविधाएं प्रदान करना तथा जोखिम भरे माहौल में कार्य करने वाले कर्मियों और महिला कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा कवच उपलब्ध कराना है।
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