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'दिल्ली से तुरंत हटाएं बैरिकेड्स, सामान्य करें ट्रैफिक', CJP प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का पुलिस को आदेश

10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई कड़ाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले म...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 01:47:54 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 01:50:16 PM (IST)
'दिल्ली से तुरंत हटाएं बैरिकेड्स, सामान्य करें ट्रैफिक', CJP प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का पुलिस को आदेश
दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश।

HighLights

  1. CJP प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का पुलिस को आदेश
  2. दिल्ली से तुरंत हटाएं सभी बैरिकेड्स- सुप्रीम कोर्ट
  3. पुलिस कार्रवाई और हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष सुनवाई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई कड़ाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में रविवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है।

कोर्ट ने बैरिकेड्स हटाने के दिए निर्देश

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखते हुए आम नागरिकों की सहूलियत का ध्यान रखा जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि जब तक अत्यंत अनिवार्य न हो, शहर में लगाए गए सभी बैरिकेड्स को तुरंत हटाया जाए। नियमों का पालन करते हुए आम जनता की निर्बाध आवाजाही को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाया जाए।


'प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन पुलिस नियमों के तहत'

जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध जताने का अधिकार सुरक्षित है। लेकिन यह प्रक्रिया 'पुलिस एक्ट' के दायरे में ही होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन जिस तरह से आप प्रदर्शन करते हैं, वह पुलिस अधिनियम के नियमों के भीतर होना चाहिए।

यह भी पढ़ें- CJP के आज फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के एलान से दिल्ली में अलर्ट, दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी

अवमानना याचिका पर हुई रविवार की विशेष सुनवाई

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का हवाला देते हुए अवमानना याचिका दायर की थी। यह मामला प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने से जुड़ा था।

सुनवाई की शुरुआत में वकीलों द्वारा रविवार को अदालत खोलने के लिए धन्यवाद देने पर जस्टिस बागची ने कहा, "धन्यवाद की आवश्यकता नहीं है, हम सदैव देश सेवा में तत्पर हैं।"