राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को दो हजार रुपये से कम का नकद चंदा मिलने की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रविधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 27 Aug 2026 07:30:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 27 Aug 2026 07:30:18 PM (IST)
HighLights
- यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है
- पिछले साल 24 नवंबर को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया गया था
- याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को दो हजार रुपये से कम का नकद चंदा मिलने की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रविधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। पिछले साल 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया था।
'पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को प्रभावित करती है'
खेम सिंह भाटी द्वारा दायर इस याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक घोषित कर रद करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को प्रभावित करती है।
इससे मतदाताओं को राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों और दानदाताओं के बारे में जरूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जो एक सूझबूझ भरा मतदान करने के लिए आवश्यक है।
याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया
इसके अलावा, याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि किसी भी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिन्ह के आवंटન के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वह नकद में कोई राशि स्वीकार न करे।
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के उस 2024 के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें चुनावी बांड योजना को रद कर दिया गया था। आयकर अधिनियम की धारा 13ए राजनीतिक दलों की आय से जुड़े विशेष प्रविधानों से संबंधित है।