• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • देश

UPI New Rules: क्या अब हर यूपीआई पेमेंट पर देना होगा चार्ज? लोकसभा में पास बिल का पूरा सच समझिए

UPI New Rules: लोकसभा से पारित 'कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' के बाद यूपीआई ट्रांजेक्शन पर भविष्य में शुल्क लगाने का रास्ता खुल गया है...और पढ़ें

By Akash SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 03:52:21 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 03:52:21 PM (IST)
UPI New Rules: क्या अब हर यूपीआई पेमेंट पर देना होगा चार्ज? लोकसभा में पास बिल का पूरा सच समझिए
UPI Bill 2026 Explained

HighLights

  1. भविष्य में एमडीआर लागू करने का रास्ता खुला
  2. आरबीआई और एनपीसीआई आगे नियम तय करेंगे
  3. बैंक साइबर सुरक्षा पर अधिक निवेश कर सकेंगे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान (Digital Payment Charges) का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। लोकसभा से 'कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब यूपीआई ट्रांजेक्शन (UPI Charges) पर शुल्क लगाया जाएगा। जानिए बिल में क्या प्रावधान हैं और इसका आम लोगों पर क्या असर होगा।

लोकसभा से पास हुए बिल का क्या मतलब है? (UPI Payment Bill 2026)

लोकसभा ने गुरुवार को 'कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' को मंजूरी दी है। इस विधेयक के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। वर्तमान व्यवस्था में बैंक या अन्य वित्तीय संस्थाएं यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लगा सकती हैं।


संशोधन के बाद भविष्य में सरकार जरूरत के अनुसार डिजिटल भुगतान पर शुल्क संबंधी व्यवस्था तय कर सकेगी। बिल में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस प्रकार के या कितनी राशि वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाया जाएगा।

लोकसभा से पास हुए बिल में UPI को लेकर क्या प्रावधान हैं

लोकसभा से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि अब यूपीआई से भुगतान करने पर तुरंत शुल्क देना होगा। फिलहाल यूपीआई ट्रांजेक्शन पहले की तरह पूरी तरह निशुल्क हैं। सरकार ने अभी तक किसी भी तरह का नया चार्ज लागू नहीं किया है। इस बिल से केवल इतना बदलाव हुआ है कि भविष्य में सरकार आवश्यकता पड़ने पर तय कर सकेगी कि किन डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाए और किन पर नहीं।

क्या अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज देना होगा

विशेषज्ञों और वित्त मंत्रालय के अनुसार, भविष्य में यदि यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी प्रकार का शुल्क लागू करने की आवश्यकता होती है तो उसके नियम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) तय करेंगे। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

क्या होता है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को मिलता है। अभी सरकार यह तय कर सकती है कि किन डिजिटल ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लागू होगा और किन पर नहीं। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था के संचालन और रखरखाव से जुड़ी लागत की भरपाई करना भी हो सकता है।

बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हुई?

जानकारों का कहना है कि देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में 700 से अधिक बैंक और वित्तीय संस्थाएं यूपीआई सेवा उपलब्ध करा रही हैं। इन संस्थानों को यूपीआई नेटवर्क के संचालन और रखरखाव पर हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

यह भी पढ़ें- Kisan Credit Card Loan: किसान क्रेडिट कार्ड के बदले नियम, अब बिना गारंटी ₹5 लाख तक के लोन का ऐसे उठाएं फायदा

यदि भविष्य में कुछ श्रेणी के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लागू किया जाता है तो इससे बैंकों को यूपीआई सिस्टम को और मजबूत बनाने, तकनीकी ढांचे को बेहतर करने तथा साइबर सुरक्षा पर अधिक निवेश करने में मदद मिल सकती है।

क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?

सरकार ने फिलहाल किसी भी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लागू नहीं किया है। भविष्य में यह तय किया जा सकता है कि केवल कुछ विशेष प्रकार के या बड़ी राशि वाले डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लागू हो, जबकि आम उपभोक्ताओं के नियमित यूपीआई भुगतान को शुल्क से बाहर रखा जाए। इस संबंध में अंतिम फैसला सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई की ओर से भविष्य में लिया जाएगा।