वंदे भारत की यह टेक्नीक कर देगी हैरान, ब्रेक लगाते ही बनती है बिजली
वंदे भारत में इलेक्ट्रिक डायनेमिक और न्यूमेटिक ब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग ऊर्जा को दोबारा बिजली में बदलती है, जबकि इमरजें...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 05 Sep 2026 03:16:26 PM (IST)Updated Date: Sat, 05 Sep 2026 03:16:26 PM (IST)
वंदे भारत की यह टेक्नीक कर देगी हैरान। (फाइल फोटो)HighLights
- वंदे भारत में इलेक्ट्रिक और न्यूमेटिक दोनों ब्रेकिंग तकनीकें हैं।
- रीजेनरेटिव ब्रेकिंग को ब्रेक कमांड पर प्राथमिकता दी जाती है।
- जरूरत पड़ने पर न्यूमेटिक ब्रेक अतिरिक्त ब्रेकिंग शक्ति देता है।
डिजिटल डेस्क। भारतीय रेलवे की शान मानी जाने वाली 'वंदे भारत एक्सप्रेस' अपनी शानदार स्पीड और लग्जरी सुविधाओं के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन इसका एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम भी इसे बेहद खास बनाता है।
हाई स्पीड पर दौड़ने वाली इस प्रीमियम ट्रेन को आपात स्थिति में पूरी सुरक्षा के साथ रोकने के लिए इलेक्ट्रिक और न्यूमेटिक दोनों ब्रेकिंग प्रणालियों का बेहतरीन तालमेल किया गया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ब्रेक लगाने के दौरान यह ट्रेन अपनी ही ऊर्जा को वापस बिजली में तब्दील कर लेती है, जिससे ऊर्जा की भारी बचत होती है।
दोहरी तकनीक से लैस है ब्रेकिंग सिस्टम
- वंदे भारत ट्रेन में इलेक्ट्रो-न्यूमेटिक (EP) ब्रेक के साथ-साथ इलेक्ट्रिक डायनेमिक यानी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। रेलवे के तकनीकी दस्तावेजों की मानें तो, जब भी लोको पायलट ब्रेक का कमांड देता है, तो सबसे पहले रीजेनरेटिव ब्रेकिंग एक्टिवेट होती है।
वहीं, अगर तुरंत अधिक फोर्स की जरूरत होती है, तो न्यूमेटिक ब्रेक अतिरिक्त ब्रेकिंग पावर प्रदान करता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि ट्रेन को रोकने के लिए किसी एक सिस्टम के भरोसे नहीं रहा जाता, बल्कि दोहरी सुरक्षा प्रणाली काम करती है। 160 की स्पीड में भी कुछ ही दूरी में रुकने की क्षमता
इस हाई-स्पीड ट्रेन के ब्रेक इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि तेज रफ्तार में भी यह सुरक्षित तरीके से रुक सके। रेलवे के तय मानकों के अनुसार, अगर ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो और अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़े, तो यह महज 1,250 मीटर की दूरी के भीतर पूरी तरह से रुकने की क्षमता रखती है। यह सुरक्षा शर्त तब भी प्रभावी रहती है जब किसी कारणवश रीजेनरेटिव सिस्टम काम न कर रहा हो।
कोटा मंडल में हुआ फ्रेट ट्रेन का ईबीडी टेस्ट
- गौरतलब है कि वंदे भारत की तर्ज पर ही देश की पहली मालगाड़ी (फ्रेट ट्रेन) भी तैयार की जा रही है। इसी साल अगस्त 2026 में राजस्थान के कोटा रेल मंडल में इस फ्रेट ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया था।
- 4 अगस्त को हुए इस अहम परीक्षण के दौरान सूखी और बारिश से गीली, दोनों तरह की पटरियों पर अलग-अलग परिस्थितियों में इमरजेंसी ब्रेक लगाकर यह परखा गया कि ट्रेन रुकने में कितनी दूरी तय करती है।
ब्रेक लगाने पर 30 प्रतिशत ऊर्जा की होती है वापसी
- वंदे भारत की सबसे अनूठी खूबी इसकी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक है। जब ट्रेन को धीमा किया जाता है, तो इसके अंदर लगी मोटर एक जनरेटर की तरह काम करने लगती है। इससे ट्रेन की ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा वापस बिजली में बदल जाता है और सीधे इलेक्ट्रिकल सिस्टम में चला जाता है।
- रेलवे ने वंदे भारत के लिए इस तकनीक के जरिए कम से कम 30 प्रतिशत ऊर्जा वापस हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस तरह यह प्रणाली न सिर्फ रफ्तार पर काबू पाती है, बल्कि पर्यावरण और बिजली बचाने में भी मददगार साबित होती है।
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