डिजिटल डेस्क। देश में एक नया बदलाव लाने की मुहीम से शुरू हुई आम आदमी पार्टी आज अपने बिखराव के मुहाने पर खड़ी है। पार्टी को शुक्रवार (24 अप्रैल) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके प्रमुख चेहरों में शामिल राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठत ने एक साथ पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन नेताओं ने न सिर्फ पार्टी छोड़ने की घोषणा की, बल्कि बीजेपी में शामिल होने की बात भी कही। उनके इस कदम ने पंजाब से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है।
अशोक मित्तल के नाम की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा डॉ. अशोक मित्तल के नाम की हो रही है। वजह साफ है. उन्हें हाल ही में राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर उनका इस्तीफा सामने आ गया। इससे यह सवाल भी उठने लगे हैं कि पार्टी के भीतर आखिर चल क्या रहा था।
कौन हैं अशोक मित्तल
अशोक मित्तल केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि देश के जाने-माने शिक्षाविद और उद्योगपति भी हैं। वह वली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के संस्थापक और चांसलर हैं, जिसे देश की बड़ी निजी यूनिवर्सिटियों में गिना जाता है। पंजाब में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अहम माना जाता है, और उनकी यूनिवर्सिटी में दर्जनों देशों के छात्र पढ़ाई करने आते हैं।
राजनीतिक सफर कैसे रहा
राजनीतिक सफर की बात करें तो वह अप्रैल 2022 में राज्यसभा पहुंचे थे और इसके बाद कई अहम संसदीय समितियों,जैसे रक्षा और वित्त में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। हाल ही में उन्हें भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री समूह का सदस्य भी बनाया गया था। इतना ही नहीं, एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वह यूरोप के कई देशों के दौरे पर भी गए थे, जहां भारत का प्रतिनिधित्व किया।
चर्चा में क्यों रहे अशोक मित्तल
अशोक मित्तल का नाम उस वक्त भी चर्चा में आया था, जब अरविंद ने 2024 में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास खाली किया था। उस समय मित्तल ने उन्हें अपने घर में रहने का ऑफर दिया था, जो उनके व्यक्तिगत रिश्तों और पार्टी के भीतर उनके कद को दिखाता है। कुछ दिन पहले ही 15 अप्रैल 2026 को प्रवर्तन निदेशालय ने उनके पंजाब (जालंधर) और गुरुग्राम स्थित 8-9 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
आप के लिए बड़ा झटका
अब जब वही नेता पार्टी छोड़कर अलग राह पर निकल पड़े हैं, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बना सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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