
डिजिटल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे चर्चित सीटों में से एक बारानगर इस समय राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने यहां से अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी को मैदान में उतारकर मुकाबले को न केवल हाई-प्रोफाइल बना दिया है, बल्कि इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।
चुनाव प्रचार के दौरान सायंतिका की रैलियों में उमड़ा जनसैलाब और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उनके लिए सड़क पर उतरना यह साफ करता है कि पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती। सायंतिका को सिर्फ एक फिल्मी चेहरे के तौर पर नहीं, बल्कि एक जुझारू नेता के रूप में पेश किया गया है।
मतगणना के शुरुआती दौर से ही बारानगर सीट पर रोमांच बना हुआ है। कभी सायंतिका बनर्जी बढ़त बनाती हैं, तो अगले ही राउंड में सजल घोष उन्हें पछाड़ देते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे राउंड बढ़ रहे हैं, दोनों खेमों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं।
सजल घोष ने अपने अभियान में भ्रष्टाचार, शिक्षा भर्ती घोटाला और कानून व्यवस्था जैसे भारी-भरकम मुद्दों को हथियार बनाया। वहीं, स्थानीय स्तर पर जलभराव और ट्रैफिक जैसी बुनियादी समस्याओं ने भी वोटर्स के मन को टटोला है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता सायंतिका के ग्लैमर और 'दीदी' के भरोसे पर मुहर लगाएगी या सजल घोष के बदलाव के वादे को चुनेगी।
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बारानगर के नतीजे केवल एक सीट की जीत-हार तय नहीं करेंगे, बल्कि यह बंगाल की भविष्य की राजनीति का आईना होंगे: