मई में गर्मी तोड़ेगी रिकॉर्ड! अल-नीनो लाएगा भीषण गर्मी और सूखे का खतरा, WMO का अलर्ट
Weather Update: अल नीनो भारत सहित दक्षिण एशिया में गर्मी बढ़ने और बारिश कम होने से फसलों के नुकसान होने की आशंका है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 03:36:55 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 03:42:09 PM (IST)
मई-जून में अल नीनो का असर बढ़ेगी गर्मी घट सकती है बारिश (AI Generated Image)HighLights
- समुद्री तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि
- हिमालय में बर्फ 27.8 प्रतिशत कम दर्ज
- जल संकट से 2 अरब लोगों पर खतरा
डिजिटल डेस्क। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो की स्थिति इस बार तय समय से पहले, यानी मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है। इससे भारत सहित दक्षिण एशिया के मौसम )(Weather Update) पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। पहले यह अनुमान था कि अल नीनो मानसून (E के दूसरे चरण, अगस्त-सितंबर में बनेगा।
क्या है एल नीनो और इसका प्रभाव
अल नीनो एक जलवायु स्थिति है, जो हर 2 से 7 साल में आती है और लगभग 9 से 12 महीनों तक बनी रहती है। इसके कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तापमान और वर्षा के पैटर्न बदल जाते हैं। आमतौर पर इसके दौरान वैश्विक तापमान में वृद्धि देखी जाती है।
भारत मौसम विज्ञान (IMD Alert) विभाग पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जारी कर चुका है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
समुद्र के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी
WMO के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में एल नीनो की स्थिति बन सकती है। संस्था के जलवायु पूर्वानुमान प्रमुख विलफ्रान मौफूमा ओकिया के अनुसार, अब सभी मॉडल एल नीनो बनने की पुष्टि कर रहे हैं और इसके मजबूत होने की संभावना है।
हर जगह बढ़ सकती है गर्मी- WMO
डब्ल्यूएमओ ने अनुमान जताया है कि मई, जून और जुलाई के दौरान जमीन का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। इसका मतलब है कि अधिकांश क्षेत्रों में ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। यह स्थिति कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हिमालय में बर्फ की कमी से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में इस साल बर्फ की मात्रा सामान्य से 27.8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। इससे नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है और करीब 2 अरब लोगों की जल सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
वैश्विक असर भी होगा स्पष्ट
आमतौर पर अल नीनो के दौरान ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में सूखे या कम बारिश की स्थिति बनती है। वहीं दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, अफ्रीका और मध्य एशिया के कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा देखने को मिलती है।