चाय की दुकान से पार्षद तक का सफर... अंजना रावत के संघर्ष से सफलता की प्रेरणादायक कहानी
महिला दिवस के अवसर पर जब हम सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो श्रीनगर नगर निगम के वार्ड-21 की पार्षद अंजना रावत की कहानी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आती है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 08 Mar 2026 05:57:27 PM (IST)Updated Date: Sun, 08 Mar 2026 05:57:27 PM (IST)
अंजना रावत के संघर्ष से सफलता की प्रेरणादायक कहानीHighLights
- चाय बेचने वाली बेटी बनी पार्षद: अंजना रावत ने संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी
- MA और MSW डिग्री के साथ चलाया 'चाय कु चस्का', जीता तीलू रौतेली पुरस्कार
- पिता के निधन के बाद संभाली दुकान, अब नगर निगम में उठा रहीं जनता की आवाज
डिजिटल डेस्क। महिला दिवस के अवसर पर जब हम सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो श्रीनगर नगर निगम के वार्ड-21 की पार्षद अंजना रावत की कहानी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आती है। विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय अंजना ने संघर्ष का रास्ता चुना और आज वह न केवल अपने परिवार का संबल हैं, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी हैं।
पिता के निधन के बाद संभाली जिम्मेदारी
अंजना के जीवन का संघर्ष वर्ष 2011 में पिता गणेश सिंह रावत के आकस्मिक निधन के साथ शुरू हुआ। परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ, तो सबसे छोटी बेटी अंजना ने पिता की चाय की दुकान को खुद चलाने का साहसिक निर्णय लिया। रिश्तेदारों और समाज के तानों की परवाह किए बिना वह सुबह 8 से शाम 7 बजे तक दुकान संभालती रहीं। इसी दुकान की आय से उन्होंने अपनी बड़ी बहन की शादी करवाई और भाई की पढ़ाई में भी पूरा सहयोग दिया।
काम के साथ जारी रखी पढ़ाई
अंजना ने साबित किया कि मेहनत के साथ शिक्षा का महत्व सर्वोपरि है। दुकान चलाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2012 में MSW और 2015 में समाजशास्त्र में MA की डिग्री हासिल की। आज उनकी दुकान ‘चाय कु चस्का’ पूरे श्रीनगर क्षेत्र में एक खास पहचान बन चुकी है।
तीलू रौतेली पुरस्कार और राजनीतिक सफर
अंजना के अटूट संघर्ष और समर्पण को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें वर्ष 2021-22 में प्रतिष्ठित 'तीलू रौतेली पुरस्कार' से सम्मानित किया। उनके इसी सेवा भाव और परिश्रम को देखते हुए स्थानीय जनता ने भी उन पर भरोसा जताया। वर्ष 2025 के नगर निगम चुनाव में वार्ड-21 के निवासियों ने उन्हें अपना पार्षद चुनकर सदन तक पहुंचाया।