सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही लग जाएगा खरमास, नोट करें तिथि
14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते ही दूसरा खरमास शुरू होगा। इस दौरान विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। 20 अप्रैल से फिर से विवाह के ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 09 Mar 2026 01:39:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 09 Mar 2026 01:39:34 PM (IST)
सूर्यदेव मीन राशि में करेंगे प्रवेश। (फाइल फोटो)HighLights
- 14 मार्च रात 1:04 बजे से खरमास शुरू
- सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से लगता है खरमास
- विवाह, गृह प्रवेश सहित मांगलिक कार्य वर्जित
धर्म डेस्क, इंदौर। ग्रहों में प्रभावशाली भगवान सूर्यदेव अपनी नियमित चाल के साथ 14 मार्च को कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करेंगे। भगवान सूर्य के धनु व मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास लग जाता है। खरमास में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। विशेषकर पणिग्रहण संस्कार के लिए कोई शुभ मुहूर्त नही होता है। इस वर्ष तीन माह की दूसरी बार खरमास लग रहा है।
- ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास के नाम से जाना जाता है। खरमास में कोई भी शुभ काम करने की मनाही है।वैदिक पंचांग के अनुसार, पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 से लेकर 14 जनवरी 2026 तक था।
दूसरा खरमास 14 मार्च मध्यरात्रि एक बजकर चार मिनट से प्रारम्भ हो जाएगा।और इस दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाएगी। इसके पश्चात 20 अप्रैल से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे, जो की 7 जुलाई तक लगातार चलेंगे। खरमास में नहीं करते हैं कोई शुभ काम
खरमास के समय में ग्रहों के राजा सूर्य देव की गति धीमी हो जाती है।वे हर साल जब देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है।शुभ कार्यों के लिए सूर्य का उच्च स्थिति में होना आवश्यक है।इस वजह से शुभ कार्य जैसे विवाह, ग्रह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ, नामकरण जैसे संस्कार आदि भी वर्जित हैं।
खरमास में शुभ काम क्यों नहीं किए जाते हैं
- ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता ग्रहों, नक्षत्रों और ऊर्जा-चक्रों की अनुकूलता पर निर्भर करती है। खरमास के दौरान सूर्य देव की स्थिति कमजोर मानी जाती है, जिससे शुभ योगों का निर्माण नहीं हो पाता। इस समय ग्रहों की शुभ दृष्टि प्रभावी नहीं रहती और ग्रह दशा में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे नए कार्यों के फल कम हो जाते हैं।
ज्योतिष शास्त्र बताता है कि जब ग्रह ऊर्जा स्थिर या मंद अवस्था में होती है, तब आरम्भ किए गए शुभ कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देते, इसलिए इस अवधि में सभी मांगलिक कार्य स्थगित रखने की सलाह दी गई है।