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ऐसा क्यों होता है शिवलिंग का आकार, बेलपत्र धतूरा चढ़ाने का भी खास महत्व…जानिए इसका रहस्य

शिवलिंग ईश्वर के निराकार, अनंत और ज्योतिर्मय स्वरूप का प्रतीक है। जानिए शिवलिंग के वास्तविक अर्थ, इसके प्राकट्य की पौराणिक कथा और इससे जुड़े 10 अद्भुत...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 11:02:23 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 11:13:27 AM (IST)
ऐसा क्यों होता है शिवलिंग का आकार, बेलपत्र धतूरा चढ़ाने का भी खास महत्व…जानिए इसका रहस्य
भगवान शिव के अनादि, अनंत और निराकार स्वरूप का प्रतीक है शिवलिंग। (AI जनरेटेड)

HighLights

  1. संस्कृत भाषा में 'लिंग' शब्द का अर्थ प्रतीक या चिह्न होता है
  2. ब्रह्मा और विष्णु के विवाद से शिवलिंग पूजन की शुरुआत हुई
  3. शिवलिंग की संरचना में ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जुड़ा है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। संस्कृत भाषा में 'लिंग' शब्द का वास्तविक अर्थ 'चिह्न', 'प्रतीक' या 'निशानी' होता है। इस प्रकार 'शिवलिंग' का सीधा अर्थ है भगवान शिव का प्रतीक। शिवलिंग किसी भी प्रकार की शारीरिक रचना का सूचक न होकर, ईश्वर के निराकार, अनंत और ज्योतिर्मय स्वरूप का प्रतीक है। संस्कृत और वैदिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग संपूर्ण ब्रह्मांड, ऊर्जा और शून्य का प्रतिनिधित्व करता है। स्कंद पुराण में आकाश को स्वयं लिंग और धरती को उसका आधार माना गया है। भौतिक विज्ञान और अध्यात्म के दृष्टिकोण से शिवलिंग पुरुष (पदार्थ) और प्रकृति (ऊर्जा) के संतुलन का प्रतीक है।

शिवलिंग के 4 महत्वपूर्ण पौराणिक तथ्य

  • ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता के विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव ने एक अनंत दिव्य ज्योति स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) प्रकट किया था। इसका आदि और अंत न मिलने पर दोनों देवों को शिव के परब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ, जिसके बाद से शिवलिंग पूजा प्रारंभ हुई।

  • आसमानी उल्कापिंड का रहस्य: विक्रम संवत से सहस्राब्दियों पूर्व पृथ्वी पर हुए भारी उल्कापात को आदिमानव ने शिव (रुद्र) का रूप माना। जहां जहां ये पवित्र आकाशीय पिंड गिरे, वहां उनकी सुरक्षा के लिए मंदिर बनाए गए। शिव पुराण के अनुसार इन्हीं पिंडों से ज्योतिर्लिंगों की परंपरा शुरू हुई।
  • प्राचीन सभ्यताओं में पुरातात्विक साक्ष्य: मेसोपोटेमिया, बेबीलोन और हड़प्पा मोहनजोदड़ो की सिंधु घाटी सभ्यता में भी शिवलिंग और पशुपतिनाथ की पूजा के पुरातात्विक अवशेष मिले हैं।
  • निराकार ईश्वर की पूजा की शुरुआत: मूर्ति पूजा से पूर्व ईश्वर के निराकार स्वरूप की उपासना के लिए शिवलिंग पूजन का प्रचलन शुरू हुआ, जो बाद में वैदिक और पौराणिक परंपराओं का मुख्य केंद्र बना।
  • शिवलिंग के 10 अद्भुत रहस्य

    1. ब्रह्मांडीय आकृति का प्रतीक: शिवलिंग का आकार घूमती हुई आकाशगंगाओं और गतिमान ब्रह्मांड की धुरी से मेल खाता है। वायु पुराण के अनुसार, प्रलय काल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन होती है और पुनः प्रकट होती है, वही शिवलिंग है।

    2. शिव का अनादि व निराकार रूप: शिवलिंग परमपुरुष और निराकार ब्रह्म का स्वरूप है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शंकर भी इसी निराकार लिंग का ध्यान करते हैं।

    3. व्यापक प्रकाश स्तंभ: पुराणों में इसे अग्नि स्तंभ, ऊर्जा स्तंभ या ज्योतिर्लिंग कहा गया है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों के रूप में ब्रह्मांड के 12 तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है।

    4. पूजा का प्रादुर्भाव: ब्रह्मा विष्णु विवाद के दौरान प्रकट अनंत ज्योति स्तंभ ही शिवलिंग पूजा का पहला ऐतिहासिक व पौराणिक आधार बना।

    5. आकाशीय पिंडों से संबंध: प्राचीन काल में आकाश से गिरे ज्योति पिंडों की स्थापना कर 108 प्रमुख केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग आज भी पूज्य हैं।

    6. पशुपति स्वरूप: प्राचीन काल में प्राकृतिक जीवन और पशुओं के संरक्षण के लिए शिव को पशुपति रूप में पूजा जाता था।

    7. रसविद्या और औषधि का रहस्य: पारद (पारा), तांबा और पीतल से निर्मित शिवलिंग पर चढ़ने वाले बेलपत्र और धतूरे के मेल को प्राचीन रसायन विद्या (Alchemy) और औषधीय विज्ञान से जोड़ा जाता है।

    8. त्रिदेव का विन्यास: शिवलिंग की संरचना तीन भागों में विभाजित होती है—निचला भाग (ब्रह्मा), मध्य भाग (विष्णु) और शीर्ष अंडाकार भाग (शिव)।

    9. शिवलिंग के विविध प्रकार: मुख्य रूप से शिवलिंग 2 प्रकार के होते हैं—उल्का/आकाशीय शिवलिंग (ज्योतिर्लिंग) और पारद (पारे से निर्मित) शिवलिंग। इसके अतिरिक्त देवलिंग, असुरलिंग, स्वयंभू आदि 6 अन्य प्रकार बताए गए हैं।

    10. विश्व प्रसिद्ध शिव पीठ: भारत और दुनिया भर में सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, पशुपतिनाथ (नेपाल) से लेकर अमरनाथ और कैलाश मंदिर तक सैकड़ों दिव्य शिवलिंग स्थापित हैं।

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