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आश्विन महीने में क्यों वर्जित माना जाता है दूध और करेला? 27 सितंबर से बदलेगा नियम, जानिए पितृ पक्ष से नवरात्रि तक त्योहारों की पूरी लिस्ट

हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाले अश्विन महीने की शुरुआत 27 सितंबर 2026 से होने जा रही है, जो 25 अक्टूबर (शरद पूर्णिमा) तक चलेगा। इस माह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti Tiwary
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 11:43:05 AM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 11:43:05 AM (IST)
आश्विन महीने में क्यों वर्जित माना जाता है दूध और करेला? 27 सितंबर से बदलेगा नियम, जानिए पितृ पक्ष से नवरात्रि तक त्योहारों की पूरी लिस्ट
27 सितंबर से शुरू हो रहा है पावन अश्विन महीना। (एआई जनरेटेड)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में आश्विन (अश्विन) मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। साल 2026 में आश्विन महीने की शुरुआत 27 सितंबर 2026 से हो रही है, जिसका समापन 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर होगा।

यह पवित्र महीना पितृ पक्ष से आरंभ होकर शारदीय नवरात्रि, विजयादशमी (दशहरा) और शरद पूर्णिमा जैसे महान पर्वों से सुसज्जित रहता है। मान्यता है कि इस माह में नियम-संयम का पालन करने से देवताओं और पूर्वजों (पितरों) का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।


आश्विन माह 2026: प्रमुख व्रत-त्योहारों की संपूर्ण सूची

  • पितृ पक्ष (महालय श्राद्ध): 27 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक
  • इंदिरा एकादशी: 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
  • महालय अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या): 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)
  • शारदीय नवरात्रि (घटस्थापना): 11 अक्टूबर 2026 (रविवार)
  • विजयादशमी (दशहरा पूजा): 20 अक्टूबर 2026
  • पापंकुशा एकादशी: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
  • शरद पूर्णिमा / कोजागर पूजा: 25 अक्टूबर 2026 (रविवार)

आश्विन माह में किसकी करें उपासना?

  • आश्विन मास में प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करना और उनकी उपासना करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
  • आश्विन के कृष्ण पक्ष में अपने पूर्वजों (पितरों) के निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य करना चाहिए।
  • आश्विन के शुक्ल पक्ष में मां भगवती दुर्गा की आराधना फलदायी होती है। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और सुबह-शाम विधि-विधान से आरती-पूजन करना उत्तम फल देता है।

आश्विन महीने में खानपान और आचरण के मुख्य नियम

  1. दूध और करेले का परहेज: आयुर्वेद और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में दूध का उपयोग वर्जित माना जाता है। साथ ही करेला खाने से भी परहेज किया जाता है।
  2. सात्विकता का पालन: इस पूरे महीने (विशेषकर पितृ पक्ष और शारदीय नवरात्रि के दौरान) मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।
  3. गृह स्वच्छता: घर में पवित्रता बनाए रखें और वाद-विवाद, क्रोध तथा कलह से दूर रहें।

सुख-समृद्धि और पितृ दोष शांति के सरल उपाय

  • दान-पुण्य: आश्विन महीने में गरीब, असहाय और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा भोजन का दान करना चाहिए।
  • पशु-पक्षियों की सेवा: पितरों की तृप्ति और शांति के लिए प्रतिदिन गाय, कौओं और कुत्तों को भोजन का अंश निकालें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ: शारदीय नवरात्रि के दौरान भक्तिभाव से दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

(नोट: यह जानकारी धार्मिक आस्था, पंचांगीय गणनाओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है।)

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