धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन तिथियों पर कन्या पूजन करने से ही नौ दिनों के व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है।
पंचांग गणना के अनुसार, इस बार तिथियों के समय को लेकर कुछ विशेष संयोग बन रहे हैं। आइए जानते हैं कन्या पूजन के सटीक मुहूर्त और समय।
महाष्टमी (Ashtami 2026) - तिथि और कन्या पूजन मुहूर्त
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वैदिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 01:50 बजे से शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि की मान्यता के कारण 26 मार्च को महाष्टमी मनाई जाएगी।
अष्टमी तिथि समापन - 26 मार्च, सुबह 11:48 बजे।
पूजन का श्रेष्ठ समय (सुबह) - प्रातः 06:18 बजे से 07:50 बजे तक।
दूसरा शुभ मुहूर्त (दोपहर) - सुबह 10:55 बजे से दोपहर 03:31 बजे तक।
महानवमी (Navami 2026) - तिथि और विशेष योग
नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग जैसा अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहा है।
सर्वार्थ सिद्धि योग - सुबह 06:17 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक।
लाभ-उन्नति मुहूर्त - सुबह 07:50 बजे से 09:22 बजे तक।
कन्या पूजन की शास्त्रीय विधि - इन बातों का रखें ध्यान
शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि साक्षात देवी की सेवा है। पूजन करते समय इन 5 बातों का विशेष ध्यान रखें-
कम से कम 9 कन्याओं (2 से 10 वर्ष की आयु) को आमंत्रित करना श्रेष्ठ माना जाता है। साथ ही एक बालक (बटुक भैरव के रूप में) को भी भोजन कराएं।
पांव पखारना - कन्याओं के घर प्रवेश पर उनके पैर धोकर उन्हें साफ आसन पर बिठाएं।
तिलक और आरती - सभी कन्याओं का कुमकुम से तिलक करें और उनकी आरती उतारें।
सात्विक भोजन - भोजन में बिना लहसुन-प्याज का हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद परोसें।
दक्षिणा और आशीर्वाद - भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार फल, वस्त्र या दक्षिणा देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
विशेष नोट - जो भक्त किसी कारणवश अष्टमी को पूजन नहीं कर पाते, वे नवमी तिथि के शुभ मुहूर्त में भी कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं।