
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जुलाई का महीना धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद विशेष होने वाला है। इस महीने की शुरुआत कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी से हो रही है, जिसके बाद योगिनी एकादशी, आषाढ़ अमावस्या और गुप्त नवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाएंगे। महीने का सबसे मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा होगी। इस मौके पर शहर स्थित इस्कॉन समेत विभिन्न मंदिरों से रथ यात्राएं निकाली जाएंगी।
इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी आते ही भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे, जिससे सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा और चातुर्मास की शुरुआत होगी। अगले चार महीनों तक विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग जाएगा। अंत में 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) के साथ इस पवित्र महीने के प्रमुख त्योहारों का समापन होगा। वहीं तीन जुलाई की रात से पंचक भी लग रहे हैं, जो पांच दिन यानी आठ जुलाई तक रहेंगे।
शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी (25 जुलाई) को सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। भगवान के विश्राम काल में चले जाने से चातुर्मास शुरू हो जाता है। यही कारण है कि इन चार महीनों के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं। इस दौरान साधु-संन्यासी भी यात्राएं बंद कर एक ही स्थान पर (आश्रम में) रहकर तप, साधना और चातुर्मास के नियमों का पालन करते हैं।
पंडित रामसुशील द्विवेदी ने बताया कि विवाह के लिए सूर्य संक्रांति देखी जाती है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास की वजह से दो ज्येष्ठ होने और कर्क संक्रांति के बाद भड़ली नवमी पर मुहूर्त नहीं होगा। केवल आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 12 जुलाई तक ही विवाह मुहूर्त हैं। इसके बाद 16 जुलाई से आठ अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा। जुलाई में एक, दो, छह, सात, आठ, 11 और 12 तारीख को विवाह के मुहूर्त हैं।
पंडित रामसुशील द्विवेदी ने बताया कि आषाढ़ का महीना भक्ति, साधना, तप और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। चातुर्मास के दौरान व्रत, सत्संग, कथा श्रवण और सेवा कार्यों का विशेष महत्व होता है। साथ ही, इसी महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत भी होती है, जो प्रकृति में नवजीवन का संचार करती है।
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