सावन में बेटियों का घर आना शुभ, आरती उतारकर स्वागत करने से चमक जाएगी मायके वालों की किस्मत…लेकिन शादी करना वर्जित क्यों
सावन में चातुर्मास के कारण विवाह वर्जित होते हैं, जबकि बेटियों का मायके आना परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाता है।
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 12 Aug 2026 11:02:20 AM (IST)Updated Date: Wed, 12 Aug 2026 11:45:30 AM (IST)
सावन के पावन महीने में विवाहित बेटियों के मायके आना शुभ माना जाता है। (AI जनरेटेड)HighLights
- देवशयनी एकादशी के कारण से सावन में विवाह वर्जित माने जाते हैं
- सावन में विवाहित बेटियों का मायके आना अत्यंत शुभ माना जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना न केवल देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन समय है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में मिठास और प्रगाढ़ता घोलने का भी एक सुंदर अवसर माना जाता है। सनातन परंपरा में इस महीने से जुड़े कई धार्मिक नियम, परंपराएं और त्योहार सदियों से चले आ रहे हैं।
इसी तरह सावन मास में शादी करना और बेटियों का मायके आना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है।
सावन में विवाह क्यों नहीं होते
हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार, सावन के महीने में विवाह और अन्य बड़े शुभ-मांगलिक कार्य न करने के दो प्रमुख धार्मिक कारण हैं-
- देवशयनी एकादशी और चातुर्मास: सावन का महीना 'चातुर्मास' के अंतर्गत आता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीरसागर में 'योगनिद्रा' में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के निद्राधीन रहने के कारण इस दौरान कोई भी विवाह या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
शिव आराधना को समर्पित समय: यह पूरा महीना भगवान शिव की कठिन साधना, तपस्या और वैराग्य से जुड़ा हुआ है। इस समय को उत्सव के बजाय आध्यात्मिक उन्नति, व्रत और संयम के लिए सर्वोत्तम माना गया है। सावन में विवाहित बेटियों के मायके आने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में विवाहित बेटियों का अपने मायके आना बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।
- माना जाता है कि सावन में बेटी के घर लौटने से मायके में खुशहाली, सुख-संपन्नता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बेटी के सौभाग्य से परिवार की उन्नति होती है।
- विवाह के बाद नए माहौल में ढलने वाली नवविवाहिता को सावन में मायके आने से मानसिक और भावनात्मक सुकून मिलता है। वैसे तो यह परंपरा नवविवाहित बेटियों के लिए विशेष है, लेकिन कोई भी शादीशुदा महिला इस परंपरा का पालन कर सकती है।
सावन में बेटी का स्वागत कैसे करें?
शास्त्रों और लोक-परंपरा के अनुसार मायके पहुंचने पर बेटी का स्वागत विशेष रीति-रिवाज से करना चाहिए-
- मुख्य द्वार की दहलीज पर बेटी की आरती उतारें, माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं।
- सावन के पारंपरिक व्यंजनों जैसे- घेवर, मालपुआ या खीर खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं।
- बेटी के हाथों से घर-आंगन में तुलसी का पौधा लगवाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
- इसके बाद बेटी को शृंगार सामग्री, वस्त्र या कोई सुंदर उपहार देकर आशीर्वाद दें।
सावन 2026: कब से कब तक रहेगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से होगी और इसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर होगा। इस बार सावन में शिव भक्ति के लिए 4 सावन सोमवार का बेहद शुभ संयोग बन रहा है।
सावन 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार (कैलेंडर)
30 जुलाई (गुरुवार): सावन मास का आरंभ
2 अगस्त: संकष्टी गणेश चतुर्थी
3 अगस्त (सोमवार): पहला सावन सोमवार
5 अगस्त: शीतला सप्तमी
6 अगस्त: मंगला गौरी व्रत
9 अगस्त: कामदा एकादशी
10 अगस्त (सोमवार): दूसरा सावन सोमवार
12 अगस्त: हरियाली अमावस्या
15 अगस्त: हरियाली तीज
17 अगस्त (सोमवार): तीसरा सावन सोमवार एवं नाग पंचमी
23 अगस्त: पुत्रदा एकादशी
24 अगस्त (सोमवार): चौथा व अंतिम सावन सोमवार
28 अगस्त (शुक्रवार): सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन
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