राम नवमी 2026: 26 या 27 मार्च दूर करें तारीख का कंफ्यूजन, जानें शास्त्रों के अनुसार कब मनेगा जन्मोत्सव?
सनातन धर्म में राम नवमी का पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारने का पावन अवसर भी ह ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 03:32:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Mar 2026 03:37:11 PM (IST)
सनातन धर्म में राम नवमी का पर्व का काफी महत्व हैHighLights
- सनातन धर्म में राम नवमी का पर्व का काफी महत्व है
- पंचांग के अनुसार 26 मार्च को ही बन रहा है महासंयोग
- साधक को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में राम नवमी का पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारने का पावन अवसर भी है। साल 2026 में इस पर्व की तिथि को लेकर भक्तों के बीच जो संशय बना हुआ है, उसका मुख्य कारण पंचांग की गणना और तिथियों का समय है।
तिथि और मुहूर्त का गणित
वैदिक पंचांग के अनुसार, भगवान राम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मध्याह्न (दोपहर) काल में हुआ था। साल 2026 में नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च, गुरुवार को सुबह 11:49 बजे से हो रही है, जो अगले दिन 27 मार्च, शुक्रवार को सुबह 10:08 बजे समाप्त होगी।
शास्त्रों का स्पष्ट मत है कि राम जन्मोत्सव उसी दिन मनाया जाना चाहिए जब दोपहर के समय नवमी तिथि विद्यमान हो। चूंकि 27 मार्च को दोपहर में नवमी तिथि उपलब्ध नहीं रहेगी, इसलिए 26 मार्च 2026 को ही राम नवमी मनाना शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ है।
पूजा का विशेष समय
साधना के लिए सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:21 बजे से दोपहर एक बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसमें भी प्रभु के प्राकट्य का मुख्य 'मध्याह्न' क्षण ठीक दोपहर 12:27 बजे होगा। इस समय की गई प्रार्थना और मंत्र जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
व्रत और पूजन विधि
राम नवमी के दिन साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पश्चात पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। घर के मंदिर की शुद्धि कर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का पंचामृत से अभिषेक करें। प्रभु को पीले फूल, चंदन, धूप और दीप अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
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इस दिन 'रामचरितमानस' का पाठ या "ॐ रामाय नमः" मंत्र का जाप करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। दोपहर के शुभ मुहूर्त में आरती कर प्रसाद वितरण के साथ जन्मोत्सव मनाएं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई यह आराधना सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।