नागपंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ महासंयोग: ग्वालियर के नाग मंदिरों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Nag Panchami 2026: सावन का सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दुर्लभ योग में शिवजी और नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 08:39:51 AM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 08:40:19 AM (IST)
HighLights
- दुर्लभ महासंयोग और शुभ मुहूर्त
- ग्वालियर के मंदिरों में मेला और आयोजन
- कालसर्प दोष मुक्ति और पूजा विधि
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी 17 अगस्त सोमवार को नागपंचमी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ नागदेवता की पूजा अर्चना करेंगे। इस दिन सावन मास का तीसरा सोमवार भी है, जिससे भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का एक दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 51 मिनट से सुबह आठ बजकर 29 मिनट तक रहेगा। शुभ शाम चार बजकर 52 मिनट, पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026 को शाम पांच बजे। पूजा का शुभ समय सुबह पांच बजकर 51 मिनट से आठ बजकर 29 मिनट तक।
सावन का सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दुर्लभ योग में शिवजी और नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष और भय से मुक्ति मिलती है। शिवलिंग पर नीले अपराजिता के फूल अर्पित करना बहुत फलदायी माना गया है। इसके साथ ही नगर के छत्री बाजार स्थित प्राचीन नागदेवता मंदिर के अलावा, तारागंज व दौलतगंज स्थित मंदिर पर मेला लगेगा। इसके साथ ही श्रावण मास का तीसरा सोमवार होने के कारण शिवालयों पर शिवभक्तों की भीड़ उमड़ेगी और मुरार में महाकाल की शोभायात्रा निकाली जाएगी।
नाग देवता की पूजा करने से परिवार को सर्प दोष से मिलती है मुक्ति
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सावन का महीना इस बार भक्तों के लिए बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार को सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-शांति व सुरक्षा का वास होता है। इसके साथ ही इस बार सोमवार का दिन होने के कारण शिव भक्त एक ही दिन में भोलेनाथ का जलाभिषेक और नाग देवता का पूजन दोनों एक साथ कर पाएंगे।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन राहु-केतु की शांति और काल सर्प दोष की पूजा के लिए प्रभावशाली दिन माना गया है। शिव पुराण के अनुसार, सावन का सोमवार और नाग पंचमी के इस दुर्लभ संयोग में शिवलिंग पर नीले रंग का अपराजिता का पुष्प (नील पुष्प) अवश्य अर्पित करें।
नाग देवता के मंदिर जाकर करें पूजा: यदि संभव हो तो नाग देवता या भगवान शिव के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
पूजा कैसे करें
- नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर में नाग देवता का चित्र या मिट्टी से बनी प्रतिमा स्थापित करें।
- देवता को जल, कच्चा दूध, हल्दी, चंदन, अक्षत (चावल) और सुगंधित फूल अर्पित करें।
- इसके बाद धूप-दीपक जलाकर मिठाई या खीर का भोग लगाएं और नाग मंत्रों का जाप करें।
- भगवान शिव का अभिषेक करें। शिवलिंग पर जल और कच्चा दूध अर्पित करके भगवान शिव का पूजन करें।
- इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।