
धर्म डेस्क। मध्य प्रदेश में विजयादशमी का पावन पर्व मंगलवार को अपार श्रद्धा, उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। देर रात तक प्रमुख मैदानों सहित अनेक स्थानों पर बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया गया। गगनभेदी जयकारों और आकर्षक आतिशबाजी के बीच लाखों शहरवासियों ने अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का साक्षी बनकर उत्सव का आनंद लिया।
विजयदशमी पर मंगलवार को दशहरा मैदान व कार्तिक मेला ग्राउंड में दशहरा उत्सव का आयोजन हुआ। रंगारंग आतिशबाजी के साथ रावण दहन किया गया। प्रभु श्रीराम का तीर लगते ही रावण का पुतला धुं धुं कर जलने लगा, यह देख नगरवासियों का मन मुदित हो गया और लोगों ने श्री राम जयघोष कर हर्ष व्यक्त किया। बुधवार को शहर में विभिन्न स्थानों पर दशहरा महोत्सव मनेगा।

दशहरा मैदान पर इस बार राक्षसराज के रूप में रावण के पुतले का निर्माण किया गया। हाथ में खड़ग, लंबे दांत, मुकुट से निकलते सींग रावण की आसुरी प्रवृत्ति को प्रदर्शित कर रहे थे। रण क्षेत्र में अट्टाहस करते हुए श्रीराम को युद्ध के लिए ललकारते रावण के पुतले को बच्चे कौतूहल से निहार रहे थे। रंगारंग आतिशबाजी ने दशहरा उत्सव की सतरंगी छटा को मनोरम बना दिया था। कार्तिक मेला ग्राउंड पर आकर्षक रूप में युवा लंकेश युद्ध भूमि में प्रभुश्री राम से दो-दो हाथ करता दिखाई दिया।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजय दशमी पर्व मंगलवार को शहर में धूमधाम से मनाया गया। दो स्थानों पर 75-75 फीट व शहर में लगभग अन्य 20 स्थानों पर रावण के पुतले का दहन किया गया।मंगलवार को विजय दशमी पर्व पर सुबह कई स्थानों पर शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। विशेषकर पुलिस थाने में शस्त्र पूजन किया गया। शाम को आरएसएस द्वारा संघ के कार्यकर्ताओं ने पथ संचलन निकाला। दशहरा उपलक्ष्य समिति द्वारा पुलिस थाने के पीछे दशहरा मैदान में 75 फीट रावण के पुतले का दहन किया गया।

दशहरा मैदान में श्रीराम ने तीर चला कर अहंकारी दशानन रावण का दहन किया। रावण की नाभि में जैसे ही तीर लगा वैसे ही रावण जलकर खाक हो गया और पूरे परिसर में जय जय श्रीराम, जय जय श्रीराम के गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा।सोमवार को विजयदशमी पर्व पर रामद्वारा दशहरा उत्सव समिति द्वारा करीब 51 फीट ऊंचे रावण का पुतला बनाया गया था। रावण दहन कार्यक्रम शाम 6.30 बजे दशहरा मैदान में प्रारंभ हुआ। सर्वप्रथम रामद्वारा गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा स्वस्तिक पूजन किया गया। रंग बिरंगी आतिशबाजी से पूरा आकाश जगमगा उठा।
पुराने शहर के ऐतिहासिक छोला मैदान में हिंदू उत्सव समिति का 78वां दशहरा उत्सव अत्यंत गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। यहां देर रात 65 फीट ऊंचे रावण का दहन किया गया। उत्सव का मुख्य आकर्षण दोपहर में पुराने शहर के मारवाड़ी रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर से शुरू हुआ पारंपरिक चल समारोह रहा। सजे-धजे घोड़े- हाथी, बैंड-बाजों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नयनाभिराम झांकियों के साथ निकला जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रात में छोला मैदान पहुंचा।
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झाबुआ के थांदला में दशहरा उत्सव के दौरान एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है। तयशुदा नियमों और परंपराओं से उलट, भगवान रामजी की सवारी के मैदान तक पहुँचने से पहले ही रावण का पुतला जलकर खाक हो गया। रावण दहन से पहले मैदान में आतिशबाजी की जा रही थी। इसी दौरान अचानक एक चिंगारी उड़कर सीधे रावण के पुतले पर जा गिरी और चिंगारी इतनी तेज थी कि कुछ ही पलों में पूरा पुतला धू-धू कर जल उठा।
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घटना के समय भगवान रामजी की सवारी शहर के बाजार से गुजर रही थी और अभी दशहरा मैदान तक पहुँची भी नहीं थी। अचानक पुतला जलने से मैदान में मौजूद भीड़ में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसे बाद में आयोजकों ने संभाल लिया।
परंपरा के अनुसार रामजी की सवारी के मैदान में पहुँचने और तीर चलाने के बाद ही रावण दहन किया जाता है। समय से पहले रावण जल जाने को स्थानीय लोग आयोजकों की बड़ी चूक मान रहे हैं। बहरहाल, असत्य पर सत्य की जीत का यह पर्व बिना रामजी के तीरों के ही पूरा हो गया।
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जिले में मंगलवार को विजयदशमी (दशहरा) पर्व परंपरानुसार मनाया गया। जगह-जगह अहंकारी रावण के पुतले का दहन किया गया। शस्त्रों के साथ वाहनों की भी पूजा-अर्चना की गई। जिले के विभिन्न स्थानों पर अग्नि बाण लगते ही धू-धूकर रावण का अहंकार जलने लगा। रावण दहन होते ही सभी ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक विजयदशमी पर्व को लेकर हर वर्ग में उत्साह नजर आया। पर्व पर नेहरू स्टेडियम में रात 10:10 बजे 51 फीट ऊंचे रावण का पुतला दहन हुआ।
सैलाना के खेल मैदान पर रावण दहन से पहले आरती की गई।
इससे पहले बरबड़ क्षेत्र में 31 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण व लंका दहन के पहले नेहरू स्टेडियम पोलोग्राउंड में बैंड की सुमधुर धुन की प्रस्तुति व आकर्षक आतिशबाजी की गई। इसके बाद भगवान श्रीराम की सवारी आने के बाद रावण (दशानंद) के पुतले व लंका का दहन किया गया। दहन से पहले श्री कालिका माता सेवा ट्रस्ट द्वारा नगर निगम से श्रीराम रथयात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होकर पोलोग्राउंड-नेहरू स्टेडियम पहुंची। इसी प्रकार सैलाना रोड श्रीराम मंदिर में राम रथ यात्रा निकली, जो प्रमुख मार्गों से होकर बरबड़ पहुंचेगी।

इस वर्ष शहर का सबसे ऊंचा 105 फीट का रावण कोलार स्थित बंजारी दशहरा मैदान में शाम सात बजे जलाया गया। इसके अलावा टीटी नगर दशहरा मैदान में 66वें उत्सव के उपलक्ष्य में 61 फीट के रावण का दहन हुआ, जबकि राजेंद्र नगर कालोनी में 70 फीट, बिट्टन मार्केट में 53 फीट और शिवाजी नगर में 12वें दशहरा महोत्सव के तहत 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का डिजिटल प्रस्तुतियों के साथ दहन किया गया। इसके अतिरिक्त अशोका गार्डन दशहरा मैदान, ओल्ड कैंपियन मैदान शाहपुरा, एमवीएम ग्राउंड, बैरागढ़ और कलियासोत मैदानों में भी पर्व का उल्लास देखने को मिला।
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भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के दशहरा मैदान में पारंपरिक धूमधाम से रावण के 56 फीट तथा कुंभकर्ण व मेघनाद के 50-50 फीट ऊंचे पुतलों का दहन हुआ। समारोह के दौरान ग्वालियर के ख्यातिप्राप्त आतिशबाजों द्वारा की गई शानदार आतिशबाजी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
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लिंक रोड स्थित गुजराती समाज भवन में एक अनुकरणीय पहल देखने को मिली, जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बिना पटाखों के रावण का प्रतीकात्मक दहन किया गया। समाजजनों ने इस दौरान नशामुक्ति का संकल्प लिया। दहन से पूर्व ''शबरी के राम'' नाटक का मंचन हुआ, जिसमें 95 वर्षीय रतनबेन ने शबरी का भावपूर्ण अभिनय कर सभी को भावविभोर कर दिया। वहीं जूनागढ़ से आए कलाकारों ने भजन जैमिंग की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं।
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ग्वालियर। आसमान छूते पुतले, उन्हें देखने के लिए मैदानों में जुटी भीड़ और दहन के साथ गूंजते जय श्रीराम के जयकारे। मंगलवार को विजयदशमी पर ग्वालियर में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। फूलबाग मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन होते ही आग की लपटें उठने लगीं।
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पुतलों के जलने के साथ आतिशबाजी ने आसमान को रोशनी से भर दिया। लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाया। फूलबाग मैदान में श्रीरामलीला समारोह समिति की ओर से 60 फीट ऊंचे रावण और 55-55 फीट ऊंचे कुंभकरण व मेघनाद के पुतले तैयार किए गए थे। दहन के समय लोगों की निगाहें पुतलों पर टिकी रहीं। आग की लपटों ने पुतलों को अपनी चपेट में लिया और देखते ही देखते उनके हिस्से जलने लगे।
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आतिशबाजी की चमक के बीच मैदान में उत्सव का माहौल बन गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी उपस्थित रहे। उन्होंने रामलीला मंच पर भगवान श्रीराम की आरती उतारी और लीला के दर्शन किए।
रामलीला के प्रसंगों के बाद हुआ पुतला दहन विजयादशमी के धार्मिक संदेश का प्रतीक बना।थाटीपुर में भी हुआ पुतला दहनथाटीपुर मैदान में दशहरा उत्सव एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया।
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यहां रावण का पुतला 55 फीट और कुंभकरण व मेघनाद के पुतले 50-50 फीट ऊंचे थे। आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद रहे। पुतलों में आग लगते ही दर्शकों ने जयकारों के साथ उत्सव मनाया।
शताब्दीपुरम में 65 फीट के रावण जलेडीडी नगर की नवदुर्गा श्रीरामलीला समिति और चेतना मंच के तत्वावधान में शताब्दीपुरम स्थित नवीन दशहरा मैदान में 65-65 फीट ऊंचे रावण के पुतलों का दहन किया गया। विशाल पुतलों को जलते देखने के लिए लोग मैदान में एकत्र हुए।