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Sarva Pitru Amavasya 2026 Date: पितृ पक्ष में कब है बड़ी अमावस्या? जानें तारीख और क्‍यों है यह बहुत महत्‍वपूर्ण?

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व है। पितृ पन्द्रह दिनों का समय होता है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होता है और सर्वपितृ अमावस्या के दिन खत्म होता...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 03:03:58 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 03:12:11 PM (IST)
Sarva Pitru Amavasya 2026 Date: पितृ पक्ष में कब है बड़ी अमावस्या? जानें तारीख और क्‍यों है यह बहुत महत्‍वपूर्ण?
सर्व पितृ अमावस्‍या 2026

HighLights

  1. यह मोक्ष अमावस्या पितरों के लिए ज़रूरी मानी जाती है।
  2. इस दिन कई धार्मिक पूजा-पाठ और उपाय किए जाते हैं।
  3. यह दिन पितृ दोष दूर करने के लिए खास माना जाता है।

धर्म डेस्‍क। सर्व पितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहते हैं। सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों को पूरी श्रद्धा से विदाई दी जाती है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और शास्त्रों के अनुसार दान-पुण्य किया जाता है। जिन लोगों को अपने पितरों की तारीख नहीं पता होती, उनका श्राद्ध उसी दिन किया जाता है। तो चलिए देखते हैं सर्व पितृ अमावस्या की तारीख और महत्व।

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व है। पितृ पन्द्रह दिनों का समय होता है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर सर्व पितृ अमावस्या के दिन खत्म होता है। इस अमावस्या की खास बात यह है कि इस दिन जिन पितरों की श्राद्ध तिथि पता नहीं होती, उनका श्राद्ध कर्म इसी अमावस्या को किया जाता है।


इस दिन उन सभी की पूजा की जाती है। यह अमावस्या पितरों के लिए ज़रूरी मानी जाती है। इस दिन कई धार्मिक पूजा-पाठ और उपाय किए जाते हैं। यह दिन पितरों के दोष दूर करने के लिए भी खास माना जाता है। आइए देखते हैं सर्वपितृ अमावस्या कब है और इस अमावस्या का महत्व क्या है।

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सर्वपितृ अमावस्या कब है?

सर्वपितृ अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर को रात 9.36 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर को रात 9.19 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदय तिथि के हिसाब से सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मानी जाएगी।

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

  • सर्वपितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन अपने पितरों का श्राद्ध किया जाता है।
  • इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी श्राद्ध तिथि हमें याद नहीं होती या पता नहीं होती।
  • ऐसे पितरों के नाम पर पूरी श्रद्धा से नैवेद्य चढ़ाया जाता है। इस दिन ब्राह्मणों को खाना दान करना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पितरों के सूक्ष्म रूप में आकर खाना खाते हैं, इसलिए इस दिन गाय, चींटियों, कुत्तों और कौओं को खाना खिलाना चाहिए।
  • माना जाता है कि इस दिन पितरों को खाना चढ़ाने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनकी कृपा हम पर बनी रहती है।