शनि प्रदोष व्रत आज: तीन शुभ योगों में करें शनिदेव की आराधना, कष्टों से मिलेगी मुक्ति
आज 'शनि प्रदोष व्रत' पारंपरिक श्रद्धा, हर्षोल्लास और विधिक आध्यात्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जा रहा है।
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 09:23:41 AM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 09:23:41 AM (IST)
शनि मंदिर बिलासपुर।HighLights
- शनिदेव के सामने बैठकर करें हनुमान चालीसा का पाठ
- रात दस बजकर ग्यारह मिनट तक रहेगा अनुराधा नक्षत्र
- इस शुभ अवसर पर शिव और शनिदेव बरसाएंगे विधिक कृपा
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः शनिवार को पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत इस बार विशेष शुभ संयोग लेकर आया है। ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ने का बताया कि इस दिन तीन शुभयोग निर्माण हो रहा है। साथ ही अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव सुबह से रात 10:11 बजे तक रहेगा। ऐसे दुर्लभसंयोग में भगवान शिव और शनिदेव की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभाव कम होने के साथ सुख-समृद्धि की प्राप्ति का विश्वास है।
पंडित संदीप न बताया बताया कि शनि प्रदोष के दिन श्रद्धालुओं को शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और श्रद्धापूर्वक 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
जरूरतमंद लोगों को काले तिल, कंबल या भोजन का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है और शनि दोष में कमी आने की मान्यता है। पंडित संदीप के अनुसार, एक काले कपड़े में दो लड्डू, कोयला, काली उड़द, सवा किलो अनाज और लोहे की कील रखकर पोटली बनाएं तथा उसे बहते जल में प्रवाहित करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव कम होते हैं। पूजा के बाद काली गाय को बूंदी के लड्डू खिलाना भी शुभ माना गया है।
हनुमान चालीसा का पाठ करने से रोग, दोष से मिलेगी मुक्ति
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ने कहा कि इस दिन शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से रोग, दोष और संकटों से राहत मिलने की मान्यता है। साथ ही जीवन में मेहनत, अनुशासन और सत्य का पालन करना चाहिए। घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें तथा मजदूरों और जरूरतमंदों की सहायता या दान करें।
वहीं झूठ बोलने, अपशब्द कहने, क्रोध करने और किसी का अनादर करने से बचना चाहिए। शनि प्रदोष व्रत पर श्रद्धा, संयम और सेवा भाव से किए गए पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विशेष फल प्राप्त होता है तथा भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।