सनातन धर्म मंदिर में द्वार और अचलेश्वर के खंभे पर पत्रा चढ़ाने चांदी की जरूरत
चांदी के अभाव में अचलेश्वर मंदिर के गर्भगृह के चौथे खंभे पर चांदी नहीं मढ़ी जा सकी है। दान की चांदी तीन खंभों पर मढ़ने के साथ चांदी के जलहरी भी निर्मि ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 12 May 2026 02:23:11 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 02:23:47 PM (IST)
सनातम धर्म मंदिर एवं अचलेश्वर मंदिर। सोशल मीडियाHighLights
- चांदी महंगी होने से दान में श्रद्धालुओं की अरुचि
- दानदाताओं को प्रेरित करने पर विचार
- द्वार के लिए 35 किलो चांदी की जरूरत
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। फालका बाजार स्थित श्रीराम मंदिर की तरह सनातन धर्म मंडल ने भगवान चक्रधर के गर्भगृह के द्वार को चांदी से मढ़ने का सपना पूर्व कार्यकारिणी ने देखा था। इसे पूरा करने का दायित्व अब अध्यक्ष विजय गोयल व उनकी कार्यकारिणी पर है। कार्यकारिणी भी अपना कार्यकाल से पहले इस संकल्प को पूर्ण करने का प्रयास कर रही है। इस चांदी के द्वार के लिए 35 किलो से अधिक चांदी की आवश्यकता है।
डेढ़ वर्ष में 17 किलो चांदी मिली है दान में
लगभग डेढ़ वर्ष में 17 किलो चांदी दान में मिली है और वो भी एक ही श्रद्धालु ने दान की। इधर, चांदी के अभाव में अचलेश्वर मंदिर के गर्भगृह के चौथे खंभे पर चांदी नहीं मढ़ी जा सकी है। दान की चांदी तीन खंभों पर मढ़ने के साथ चांदी के जलहरी भी निर्मित की गई है।
वर्तमान में चांदी के भाव आसमान पर होने के कारण मध्यवर्गीय परिवार तो चांदी दान करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, जबकि जलहरी के समय 100 ग्राम से लेकर ढाई सौ ग्राम चांदी सहजता से श्रद्धालुओं ने अचलेश्वर मंदिर को दान की थी। सनातन धर्म मंडल व अचलेश्वर मंदिर संचलन समिति का दावा है कि इस संकल्प को पूरा करने के लिए दानदाताओं को प्रेरित किया जा रहा है।
पूर्व अध्यक्ष ने की थी घोषणा
सनातन धर्म मंडल ने भगवान चक्रधर के गर्भगृह के द्वार को चांदी से मढ़ने की तैयारी शुरु कर दी है। इसकी घोषणा सबसे पहले पूर्व अध्यक्ष कैलाश मित्तल ने की थी। उनका दावा था कि उनके पास दानदाता भी है। इसी बीच मंडल में चुनाव की प्रक्रिया शुरु हो गई और उनके पैनल के प्रधानमंत्री रमेश गोयल लल्ला ही जीत पाए। इसके बाद अध्यक्ष की कमान विजय गोयल के हाथ चली गई।
नई कार्यकारिणी ने संकल्प को दोहराया
नई कार्यकारिणी ने भी इस संकल्प को दोहराया। मंडल में विराजित देवाधिदेव महादेव की जलहरी के निर्माण के समय सात किलो चांदी भगवान चक्रधर के द्वारा के समय दान में आई। पिछले माह मोहिनी एकादशी को स्थापना दिवस समारोह में 10 किलो चांदी के लिए 21 लाख रुपये मंडल को दान में मिले। कुल मिलाकर 17 किलो चांदी जमा हो गई, जबकि द्वार के निर्माण में 35 किलो से अधिक की चांदी लगने का अनुमान है। अर्थात इतनी ही चांदी की और आवश्यकता है।
वहीं अचलेश्वर मंदिर के गर्भगृह का चौथा खंभा भी चांदी से मढ़ना है। अचलेश्वर मंदिर के गर्भगृह के तीन खंभे चांदी से मढे जा चुके है। एक खंभे पर चांदी का पत्रा चढ़ाने के लिए 36 किलो के लगभग चांदी लगी है, यानिकी के 110 किलो के लगभग चांदी लग चुकी है। मंदिर में रखी चांदी का भी उपयोग हो चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा, बैठक के बाद कारीगारों को बुलाने पर विचार होगा
सनातन धर्म मंडल के प्रधानमंत्री रमेश चंद्र गोयल ने बताया कि कुछ चांदी दान में आ गई है, कुछ चांदी मंदिर के कोषालय में सुरक्षित है और चांदी की आवश्यकता पड़ने पर दानदाताओं से संपर्क किया जाएगा। वाराणसी से कारीगारों को बुलाने के लिए कार्यकारिणी की बैठक में विचार किया जाएगा।