Third Sawan Somwar 2026: भूलकर भी सांप को न पिलाएं दूध, तीसरे सोमवार नागपंचमी और सावन का महासंयोग
17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के अद्भुत संयोग पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा की जाएगी। इस दिन सांप को दूध पिलाना वर्जित माना ज...और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 11:48:22 AM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 12:24:10 PM (IST)
सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ महासंयोग। (AI जनरेटेड)HighLights
- 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का महासंयोग बन रहा है
- इस दिन सांप को दूध पिलाना वर्जित है। पूजा केवल धातु-मिट्टी की प्रतिमा से करनी चाहिए
- इस दिन भूमि खोदने, खेत जोतने और जीवित सांपों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन शिवरात्रि के बाद 17 अगस्त 2026 का दिन भगवान शिव की साधना के लिए अत्यंत विशेष और दुर्लभ माना जा रहा है। इस दिन सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का पावन पर्व एक साथ पड़ रहा है। इस अद्भुत संयोग को 'सोमवती नागपंचमी' कहा जाता है। नाग देवता (वासुकी) भगवान शिव के अतिप्रिय गण और उनके गले का आभूषण हैं। इसलिए महादेव को 'नागभूषण' भी कहा जाता है। ऐसे में सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना शिव भक्तों और नाग पूजा के लिए एक महासंयोग लेकर आ रहा है।
नाग और भगवान शिव के संबंध का आध्यात्मिक अर्थ
भगवान शिव को 'पशुपति' कहा जाता है। उनके शरीर पर सर्पों का आभूषण के रूप में विराजमान होना यह दर्शाता है कि दुनिया के सबसे भयावह और विषैले जीव भी भोलेनाथ की शरण में सुरक्षित हैं।
साथ ही नाग विष का प्रतीक हैं और महादेव 'नीलकंठ' हैं, जिन्होंने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था। शिव जी के गले में वासुकी नाग का होना यह दर्शाता है कि महादेव का विष, भय और मृत्यु पर पूर्ण नियंत्रण है।
नाग पंचमी एवं सावन सोमवार की संयुक्त पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थल को साफ करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर हल्दी मिले चंदन से नाग देवता की आकृति बनाएं या मिट्टी/धातु की नाग प्रतिमा स्थापित करें।
- सबसे पहले भगवान श्री गणेश और शिव जी का ध्यान करें।
- चूंकि इस दिन सावन सोमवार भी है, इसलिए शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक करें और शिवलिंग पर लिपटे/विराजमान नाग देवता का भी पूजन करें।
- पूजन सामग्री: नाग देवता को रोली, चंदन, हल्दी, कुमकुम, अक्षत और ताजे पुष्प अर्पित करें।
- भोग- महाप्रसाद: धूप-दीप जलाएं। परंपरा के अनुसार नाग देव को खील, कच्चा दूध, चीनी या चावल की खीर का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप: 'ॐ नमः शिवाय' अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा सर्प-भय से मुक्ति की प्रार्थना करें।
नाग पंचमी का विशेष पूजा मंत्र
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
नाग पंचमी पर भूलकर भी न करें ये काम
- जीवित सांप से छेड़छाड़ न करें: पूजा के लिए जीवित सांप को पकड़ने या सताने की गलती बिल्कुल न करें। केवल धातु, मिट्टी की प्रतिमा या चित्र की ही पूजा करें।
- सांप को दूध न पिलाएं: जीवित सांप के मुंह में जबरदस्ती दूध न डालें। वैज्ञानिक रूप से सांप दूध नहीं पीते, इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। केवल प्रतीकात्मक रूप से प्रतिमा पर दूध अर्पित करें।
- केमिकल या सिंदूर न लगाएं: जीवित सांप पर रंग, हल्दी, सिंदूर या अन्य पदार्थ सीधे न छिड़कें।
- जमीन की खुदाई से बचें: नाग पंचमी के दिन भूमि खोदने, खेत जोतने या साग-सब्जी काटने/छीलने जैसे कार्यों से बचना चाहिए, ताकि जमीन के अंदर रहने वाले जीवों को कोई नुकसान न पहुंचे।