

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रकृति, भक्ति और पितृ तर्पण का पावन पर्व हरियाली अमावस्या बुधवार को उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस बार यह पर्व पुष्य नक्षत्र, स्वराशि के चंद्रमा से बने दुर्लभ गौरी योग, गजकेसरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के महासंगम के बीच आया है। हरियाली अमावस्या पर नर्मदा के पावन तटों पर पवित्र स्नान, पितृ तर्पण और दीपदान के साथ-साथ शहरभर में वृहद स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। ग्रीन थीम पर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस हरियाली अमावस्या पर ग्रहों और नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी बन रही है । पुष्य नक्षत्र के साथ चंद्रमा अपनी ही स्वराशि कर्क में विराजमान रहेंगे, जिससे गौरी योग निर्मित हो रहा है। चंद्रमा और गुरु की युति से अत्यंत शुभ गजकेसरी योग की रचना हो रही है। इसके अतिरिक्त सर्वार्थ सिद्धि और शिववास योग का महासंगम धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्र साधना और प्रकृति सेवा के फल को कई गुना बढ़ा देगा।
भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना के इस महासंयोग पर जबलपुर के प्रमुख नर्मदा घाटों गौरीघाट, तिलवाराघाट और लमहेटाघाट पर भोर से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ेगा। श्रद्धालु पवित्र जलधारा में तिल प्रवाहित कर पितरों का तर्पण करेंगे। मान्यता है कि इस दिन पितृ पूजन और दान-पुण्य करने से पितृदोष और अनजाने में हुई भूलचूक के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं।कालसर्प दोष जैसे कष्टकारी ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए तटों और मंदिरों में विशेष उपाय व दान किए जाएंगे।
प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आभार प्रकट करने के इस पर्व पर पीपल और बरगद के वृक्षों का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। शहर के सामाजिक संगठनों ने व्यापक पौधरोपण अभियान की तैयारी की है।विशेष रूप से महिला संगठन इस पर्व को ग्रीन थीम के रूप में मना रहे हैं, जहां महिलाएं हरित परिधान पहनकर पूजा-अर्चना करेंगी। जगह-जगह पौधे रोपकर उनके संरक्षण का संकल्प लेंगी।
हरियाली अमावस्या पर प्रातःकालीन पवित्र स्नान और ध्यान के लिए शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:36 बजे से 05:21 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 02:39 बजे से 03:30 बजे तक विशेष शिव-पार्वती पूजन के लिए विजय मुहूर्त रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त शाम 06:56 बजे से 07:18 बजे तक रहेगा, जिसमें संध्या आरती और दीपदान करना अति शुभ माना गया है। वहीं मंत्र जाप और सिद्धि हेतु सर्वार्थ सिद्धि योग रात 09:29 बजे से अगले दिन सुबह 06:06 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि विशेष शिव साधना के लिए निशिता मुहूर्त मध्यरात्रि 12:08 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
व्रतधारी प्रातःकाल स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य और तिलांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद पंचोपचार विधि से भगवान श्रीहरि विष्णु व शिव-पार्वती का पूजन कर विष्णु चालीसा, स्तोत्र का पाठ और तत्पश्चात दान-पुण्य करेंगे।सारा दिन व्रत रखेंगे। वट, पीपल की पूजा की जाएगी।
यह भी पढ़ें- जबलपुर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने समझाया, नकली का मतलब खराब नहीं; मानक से बाहर होना है