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MPL 2026: बिना दबाव के खेल से चंबल घड़ियाल्स ने पाई सफलता, कोच चित्रा बाजपेयी की राणनीति से कोई मैच नहीं हारे

मध्य प्रदेश लीग 2026 में चंबल घड़ियाल्स ने बिना कोई मैच गंवाए ट्रॉफी अपने नाम की। टीम की सफलता के पीछे कोच चित्रा बाजपेयी की रणनीति रही, जो पिछले सत्र...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 11:00:20 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 11:05:49 AM (IST)
MPL 2026: बिना दबाव के खेल से चंबल घड़ियाल्स ने पाई सफलता, कोच चित्रा बाजपेयी की राणनीति से कोई मैच नहीं हारे
चंबल घड़‍ियाल्स टीम की खिलाड़‍ियों से चर्चा करती कोच चित्रा बाजपेयी और मोहनीष मिश्रा।

HighLights

  1. चित्रा ने संभागीय मैचों से 80-90 खिलाड़ियों का डेटा रखा और बड़े नाम की जगह प्रदर्शन को तवज्जो दी
  2. कप्तान पूजा वस्त्रकार अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली एकमात्र खिलाड़ी थीं, राहिला फिरदौस के पास WPL का अनुभव था
  3. कनिष्का ठाकुर ने फाइनल में अर्धशतक लगाया, धानी बुचाड़े और अनामिका रघुवंशी ने गेंद-बल्‍ले दोनों से योगदान दिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। टी-20 क्रिकेट में परिणाम खेल के साथ किस्मत पर भी निर्भर करते हैं। कई बार नजदीकी मैच किस ओर मुड़ जाए पता नहीं चलता। मगर मध्य प्रदेश लीग की चैंपियन टीम चंबल घड़ियाल्स ने अपने प्रदर्शन में ऐसी निरंतरता रखी कि प्रशंसक भी दंग रह गए।

पूरे टूर्नामेंट में चंबल घड़ियाल्स टीम ने कोई मैच नहीं गंवाया और अपराजेय रहते हुए ट्राफी हासिल की। मैदान में सफल प्रदर्शन खिलाड़ियों ने किया, लेकिन पर्दे के पीछे की रणनीति बनाने में टीम की कोच चित्रा बाजपेयी की अहम भूमिका रही।


चित्रा का रिकॉर्ड भी उनकी टीम की तरह ही अपराजेय है। पिछले सत्र में बुंदेलखंड बुल्स की कोच थी और इस टीम को ट्राफी जिताई थी। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रहीं चित्रा चर्चाओं से दूर रहना पसंद करती हैं। टीम की सफलता पर चर्चा करते हुए कहती हैं यह सभी की संयुक्त मेहनत है।

टीम में पूर्व रणजी क्रिकेटर अब्बास अली और मोहनीष मिश्रा जैसे अनुभवी कोच भी साथ थे। इनके अनुभव का टीम को फायदा मिला। खुद महिला क्रिकेटर होने से प्रदेश की महिला खिलाड़ियों से मेरी नजदीकी का हमने बेहतर फायदा उठाया।

टीम चयन से पहले क्या रणनीति थी, यह पूछने पर उन्होंने कहा- जब से मुझे टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई, तभी से मैंने अपनी योजना प्रारंभ कर दी थी। मैं संभागीय मैचों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रख रही थी। प्रदेश की 80-90 खिलाड़ियों का पूरा डाटा मेरे पास था। फिर मैंने फ्रेंचाइजी के साथ टीम चयन पर चर्चा की।

बड़े नाम के बजाए बेहतर प्रदर्शन पर ध्यान दिया

पहली रणनीति खिलाड़ियों के ड्राफ्ट में से योग्य का चयन करना था। मैंने प्रारंभ से ही तय किया था कि पूजा वस्त्रकार को हमारी टीम में होना चाहिए। वे न सिर्फ अच्छी आलराउंडर हैं बल्कि उतनी ही अच्छी कप्तान भी हैं। उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव का लाभ टीम को मिलना तय था। हमारी टीम में वे ही एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थी। उनके अलावा उनके अलावा राहिला फिरदौस के पास महिला आइपीएल का अनुभव था।

टीम ने इन दोनों के अलावा जिंसी जार्ज और कनिष्का ठाकुर भी अनुभवी खिलाड़ी थीं। इनके अलावा सभी जूनियर खिलाड़ी थीं। हमने बड़े नामों के बजाए बड़े काम पर ध्यान दिया। कनिष्ठा ठाकुर ने बहुत अच्छी बल्लेबाजी की। खासकर फाइनल में अर्धशतक बनाया। बाएं हाथ की स्पिनर धानी बुचाड़े और बाएं हाथ की मध्यम तेज गेंदबाज अनामिका रघुवंशी ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। इन्होंने गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी योगदान दिया।

कप्तान पूजा ने चोट के कारण नहीं की गेंदबाजी

चित्रा ने बताया कि टीम में सभी खिलाड़ियों ने अपना योगदान दिया। हमारी टीम एक-दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं थी। पूजा वस्त्रकार द्वारा अधिकांश मैचों में गेंदबाजी नहीं करने पर उन्होंने कहा- पूजा के कंधे की चोट लगी थी और वह चोट से उबर रही है। हमें इसकी जानकारी थी। ऐसे में हम उससे सिर्फ बल्लेबाजी करा रहे थे।

हमने गेंदबाजी का दबाव नहीं डाला। वह बल्लेबाजी में भी बहुत अच्छा कर रही थी। मगर फाइनल में जब टीम को जरूरत थी तो उन्होंने खुद आगे होकर गेंदबाजी का जिम्मा संभाला। विपक्षी टीम ग्वालियर शेरनीज की कप्तान नुजहत परवीन बहुत अच्छी बल्लेबाजी कर रही थीं, ऐसे में पूजा ने कंजूसी से रन देते हुए मैच जिताने में अहम भूमिका निभाई।

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